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Panchkula News: पिता को मुखाग्नि देने से पहले बेटी बोली-निवेशकों का पूरा पैसा देंगे वापस

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मोहाली। पर्ल ग्रुप के संस्थापक एवं 45 हजार करोड़ रुपये के ठगी के आरोपी निर्मल सिंह भंगू के बुधवार को अंतिम संस्कार से पहले उनकी बेटी ने पब्लिक नोटिस जारी कर निवेशकों का पूरा पैसा वापस करने की बात कही। निर्मल सिंह भंगू का अंतिम संस्कार भी उनकी बेटी बरिंदर कौर भंगू ने गांव बलौंगी के श्मशानघाट में किया।
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इस मौके पर पूर्व राज्यसभा सदस्य जगमीत सिंह बराड़, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और उनके परिजन व करीबी मौजूद रहे। बेटी बरिंदर कौर भंगू ने अपने पिता निर्मल सिंह भंगू को मुखाग्नि भेंट की। भंगू चमकौर साहिब के नजदीकी गांव अटारी का रहने वाला था। उत्तर भारत के साथ देशभर में पांच लाख लोगों को ठगने वाले भंगू को सीबीआई ने 8 जनवरी, 2016 को गिरफ्तार किया था। भंगू का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में देहांत हो गया था।

भंगू की बेटी बरिंदर कौर भंगू ने एक पब्लिक नोटिस जारी कर कहा कि पर्ल ग्रुप के प्रत्येक निवेशकों का एक-एक पैसा चुकाया जाएगा। दिवंगत निर्मल सिंह भंगू पीएसीएल लिमिटेेड और पीजीएफ लिमिटेड के निवेशकों को धन की वापसी से संबंधित मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विचार किया जा रहा है। इसके लिए दो कमेटियां (लोढा कमेटी और स्पेशल कमेटी) बनाई गई है।
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पीएसीएल लिमिटेड और पीजीएफ लिमिटेड के निवेशकों को धन की वापसी इन्हीं कमेटियों की देखरेख में की जाएगी। बरिंदर कौर भंगू ने कहा कि पर्ल ग्रुप परिवार की ओर से और अपने पिता के सम्मान में वह अपना समर्थन देने और प्रत्येक निवेशक को पैसे के पुनर्भुगतान के संबंध में न्यायिक या अर्ध-न्यायिक अधिकारियों को अपना पूरा सहयोग प्रदान करने का आश्वासन देती है। उन्होंने कहा कि पीएसीएल लिमिटेड के साथ-साथ पीजीएफ लिमिटेड के प्रत्येक निवेशक को यह आश्वासन है कि वह आपके अधिकारों की रक्षा करने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ेगी और जब तक आप सभी को भुगतान नहीं मिल जाता, वह हमेशा आपके हित में खड़ी रहेंगी।


निवेशकों को दिया था रकम पांच साल में दोगुनी करने का झांसा
पांच दशक पहले भंगू गांव से कोलकाता चला गया था। पीयरलैस नामक चिट फंड कंपनी में काम किया। फिर गोल्डन फॉरेस्ट इंडियन कंपनी से जुड़ गया। कुछ साल बाद कंपनी बंद हो गई। बाद में भंगू ने 1980 में पर्ल गोल्डन फॉरेस्ट (पीजीएफ) कंपनी और 1996 में पीएसीएल नाम की कंपनी खड़ी की। पर्ल कंपनी पांच साल में रुपये दोगुना करने का झांसा देती थी। एजेंट को भी मोटा कमीशन मिलता था। इसी चक्कर में लोग फंसते थे। पर्ल कई कंपनियों का एक समूह है जो प्रॉपर्टी में काम करता था। इसकी एक शाखा पीएसीएल है जो लोगों से एक साथ एफडी के रूप में और किस्तों के रूप में रुपये लेती थी।

यह है प्रावधान
कानून में यह प्रावधान है कि अगर किसी कंपनी की कुल कीमत 100 करोड़ रुपये है और देनदारी 200 करोड़ रुपये की है तो उसे अपनी कुल कीमत की राशि यानी कि 100 करोड़ रुपये का भुगतान करना ही होगा। निजी देनदारी है तो भी यही नियम लागू होगा और निजी संपत्ति की कीमत जितनी राशि का भुगतान करना होगा।
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