बीसी प्रमाणपत्रों संबंधी अस्पष्टता होगी दूर, सरकार चलाएगी राज्य स्तरीय विशेष अभियान
सेवा केंद्रों और डीसी कार्यालयों में लगाई जाएंगी सरल हिदायतें : डॉ. बलजीत कौर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बैकवर्ड क्लास (बीसी) प्रमाणपत्रों की पात्रता अब माता-पिता की स्थिति के आधार पर तय होगी। जीवनसाथी की आय का इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार बीसी प्रमाणपत्रों संबंधी अस्पष्टता दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी।
सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मंत्री बलजीत कौर ने बताया कि नियमों की गलत व्याख्या से योग्य आवेदकों को दिक्कतें आ रही थीं। इस अभियान से इन समस्याओं को दूर किया जाएगा। चाचा, ताया या अन्य रिश्तेदार की स्थिति पात्रता का आधार नहीं बनेगी। सांविधानिक पदों पर तैनात व्यक्ति और क्लास-एक, क्लास-दो अधिकारी बीसी श्रेणी के लाभों के हकदार नहीं होंगे।
क्रीमी लेयर की शर्तों में आने वाले परिवारों के बच्चे भी अपात्र होंगे। यदि माता-पिता का प्रमाणपत्र नहीं बना, तो भी योग्य व्यक्ति पहली बार आवेदन कर सकता है। नियमों का एकसमान पालन सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्तों के साथ बैठकें होंगी।
विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता :
सेवा केंद्रों और डीसी कार्यालयों में सरल हिदायतें प्रदर्शित की जाएंगी। टॉप क्लास स्कूल एजुकेशन योजना के तहत योग्य बीसी विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता मिलेगी। नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए लगभग 75 हजार रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे। ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए करीब 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ष की सहायता मिलेगी। लगभग 6,000 स्कूलों की सूची डॉ. भीमराव आंबेडकर पोर्टल पर अपलोड होगी।