चंडीगढ़। मुख्य न्यायाधीश की अदालत का बॉयकाट करने के फैसले के खिलाफ अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की है। काउंसिल ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों में ही किसी न्यायाधीश की अदालत के बायकॉट की मांग की जा सकती है। वर्तमान में जिस आधार पर यह मांग की गई है वह उन मानकों पर खरी नहीं उतरती।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि बार एसोसिएशन को इस तरह की राजनीति से दूर रहने की जरूरत है। साथ ही इस तरह के प्रस्ताव पास करने से बार एसोसिएशन को गुरेज करना चाहिए। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एवं हरियाणा द्वारा मुख्य न्यायाधीश की अदालत का बॉयकाट करने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के फैसले पर रोक के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह टिप्पणी की।
बीते दिनों हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश पर अनसुनी करने का आरोप लगाया था। बार एसोसिएशन का कहना था कि बेहद महत्वपूर्ण मामलों में भी सुनवाई के लिए मेंशनिंग अनिवार्य की गई है और इस दौरान भी पिक एंड चूज की नीति अपनाई जा रही है। 7 मई को बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश की अदालत के बॉयकाट का फैसला लिया था और कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का तबादला किया जाए और जब तक तबादला नहीं होता तब तक कोई भी वकील उनकी अदालत में पेश नहीं होगा।
सात सदस्यों की टीम निपटाएगी विवाद को
बार एसोसिएशन द्वारा पास किए गए इस प्रस्ताव पर पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल ने रोक लगा दी थी जिसके खिलाफ बार एसोसिएशन ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया में अपील की थी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अब सीनियर वकील अश्वनी चोपड़ा की अध्यक्षता में 7 सदस्यों वाली टीम का गठन कर मुख्य न्यायाधीश से बैठक कर इस विवाद का हल करने का आदेश दिया है।