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Panchkula News: बहरूपिए ने सूझ-बूझ से जीता दिल, राजा ने बना दिया गुप्तचर विभाग का प्रमुख

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फोटो सहित
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय नौटंकी महोत्सव के दौरान शनिवार को बहरूपिया नाटक का मंचन हुआ। मंचन के दौरान कलाकाराें ने बहुत ही सजीव अभिनय किया, जिस पर दर्शकों ने काफी तालियां बजाई। इसमें दिखाया गया कि बहरूपिया ने किस तरह सूझ-बूझ से राजा को खुश कर दिया और राजा ने उसे गुप्तचर विभाग का प्रमुख बना दिया।
नाटक में दिखाया गया कि राजा के पास एक बहरूपिया होता है। उसे एक देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह किसी का भी स्वांग धारण कर सकता है। वह जिसका भी स्वांग धारण करता है, उसे पूरी आत्मीयता से निभाता भी है। एक दिन राजा ने उसे संत का स्वांग धारण करने के लिए कहा। कुछ दिन बाद बहरूपिया संत के स्वांग मेंं आता है और लोगों को भी आध्यात्मिक प्रवचन देता है। राजा भी उसके ज्ञान से प्रभावित हो जाते हैं। बहरूपिए से ईर्ष्या रखने वाले एक राजनाई ने राजा के कान भर दिए। उसने कहा कि दाढ़ी मूंछ बढ़ाकर तो कोई भी संत बन सकता है। उससे चुड़ैल का स्वांग धारण करने के लिए कहिए। जब राजा ने बहरूपिए को ऐसा करने के लिए कहा तो उसने पहले अभयदान मांगा। जब राजा ने अभयदान दिया तो बहरूपिए ने चुड़ैल का स्वांग धारण कर लिया। जब वह राजा के दरबार में पहुंचा तो वहां पर दुष्कर्मी और राक्षसी प्रवृत्ति का राजा का साला नशे में धुत्त बेसुध होकर पड़ा था। चुड़ैल बने बहरूपिए ने प्यास बुझाने के लिए उसका पूरा रक्त पी लिया। इससे उसकी मौत हो गई। वचन में बंधा होने के कारण राजा कुछ भी नहीं कर पाए।
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उसके बाद नाई ने राजा को सलाह दी कि इसे सती का स्वांग रचने के लिए कहिए, वह अपने आप जलकर मर जाएगा। बहरूपिए ने सती का स्वांग धारण किया और अपने पति के साथ चिता में बैठ गया। चिता में आग लगाई गई तो तेज आंधी और बारिश आ गई। इससे वह बहरूपिया जलने से बच गया। काफी दिन बाद जब बहरूपिया राजदरबार में पहुंचा तो राजा उसे देखकर हैरान हो गए। उससे पूछा कि तुम तो आग में जल गए थे। बहरूपिए ने सूझबूझ दिखाते हुए कहा कि देवलोक में राजा के माता-पिता और अन्य परिवारजनों से मिला। वहां उनके बाल और नाखून बहुत बढ़े हुए हैं। काेई उनको काटने वाला नहीं है। उनके निवेदन पर देवों ने बहरूपिए को वापस पृथ्वीलोक पर भेज दिया।
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जब राजा ने पूछा कि राजनाई को वहां कैसे भेजा जाए तो बहरूपिये ने कहा कि जैसे उनके माता-पिता और वो खुद गया था, वैसे ही राजनाई को भी देवलोक भेजा जाए ताकि वह राजा की माता-पिता के नाखून और बाल काट सके। राजा बहरूपिये की सूझ-बूझ से काफी खुश हुए और उसे गुप्तचर विभाग का प्रमुख बना दिया। नाटक में मुख्य पात्रों की भूमिका में धीरज अग्रवाल, सचिन केसरवानी, मनोज कुमार, अभयराज यादव, बसंत लाल त्यागी आदि कलाकार नजर आए।
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