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Panchkula News: बादल संगत दर्शन में जब तक सबका दुख-दर्द नहीं सुन लेते थे, तब तक सीट से उठते नहीं थे

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चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल लोगों के दुख दर्द को बड़े करीब से समझते थे। लोगों को अपनी बात उन तक पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ के चक्कर न काटने पड़ें इसलिए उन्होंने संगत दर्शन प्रोग्राम शुरू किए थे। छोटे-छोटे गांवों में अफसरों के साथ जाकर लोगों की दिक्कतों को सुनते थे। संगत दर्शन खत्म होने का कोई समय नहीं होता था, जब तक वह अपने प्रोग्राम में आए आखिरी व्यक्ति की दिक्कत सुन नहीं लेते थे, तब तक वहां से जाते नहीं थे। यह कहना है कि पंजाब व चंडीगढ़ में विभिन्न सरकारी पदों पर काम कर चुके और पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के पूर्व चेयरमैन बलबीर सिंह ढोल का। पूर्व चेयरमैन ढोल ने राजनीतिक जीवन पर स्टडी कर ‘नेड़ियों तके मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल’ (नजदीक से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल) शीर्षक से किताब लिखी है। इसमें उनकी हर चीज को अच्छे तरीके से लिखा है। उन्होंने बताया कि पांच बार तक बादल के मुख्यमंत्री बनने के पीछे की एक वजह यह थी कि वह समय का पालन करते थे। कभी भी किसी समागम में देरी से नहीं जाते थे। बल्कि पांच मिनट पहले पहुंच जाते थे। बादल लंबे समय तक काम करते थे। सुबह 6:30 से रात 1:30 बजे तक काम करते थे। इसके बाद वह चंडीगढ़ पहुंच जाते थे, इसके बाद अधिकारियों से बैठकें करते थे।
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अधिकारियों पर नहीं बनाते थे दबाव, नियमों का करते थे पालन
प्रकाश सिंह बादल सरकारी अफसरों से बहुत ही अच्छे तरीके से पेश आते थे। वह कभी भी उन नियमों को ताक में रख काम करने के लिए दबाव नहीं बनाते थे। बलबीर सिंह ढाेल बताते हैं कि 2007 के मध्य में ही चुनाव थे। उन्हें प्रकाश सिंह बादल के लंबी हलके का रिटर्निंग अफसर लगाया गया था 24 जनवरी 2007 को वोट बनाने का आखिरी दिन था। तय समय के बाद मैंने वोट बनाने से मना कर दिया। आखिर में उन्हें प्रकाश सिंह बादल का फोन आया। उन्होंने कहा कि सरदार साहिब हमारी कुछ वोटें रह गई हैं, उन्हें बनवा दों। उन्होंने इस पर डरते हुए जवाब दिया कि तारीख निकल गई है। ऐसे वोट नहीं बन सकते हैं, तो आगे से उनका जवाब था कि अगर नियम से वोट नहीं बन सकते तो रहने दें। वे कहते थे काका हम किसी अफसर का ऐसे नुकसान नहीं कर सकते हैं। इस बात को सुनकर उन्हें काफी राहत मिली।

बस हादसे के बाद अफसरों से पहले पहुंच गए थे फिरोजपुर
ढोल बताते हैं कि बादल जनता के दुख-दर्द को लेकर भी गंभीर थे। 2007 में फिरोजपुर में एक बस हादसा हो गया था। सीएम बादल को जैसे ही रात को सूचना मिली तो वह सुबह अपने चॉपर से वहां के लिए निकल गए। उन्होंने खुद जाकर सारी स्थिति का जायजा लिया और घायलों से मिले। हालांकि उस समय तक वहां पर सीनियर अधिकारी भी नहीं पहुंच पाए थे।
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