पंचकूला। एक व्यक्ति तीन साल से कोमा में अस्पताल में पड़ा है। वहीं 25 वर्षीय बीमार युवा ने पैसों की कमी के चलते दम तोड़ दिया, कोई चार साल से घर में बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, तो किसी की दिमागी हालत ठीक नहीं होने के चलते तंग गलियों में दो वक्त की रोटी के लिए भटक रहा है। ये कहानी है पंचकूला वार्ड नंबर 7 के इंदिरा कॉलोनी के उन जरूरतमंदों की जो आयुष्मान भारत योजना के लाभ वंचित हैं।
उनको इस योजना से मिलने वाले लाभ की दरकार है, लेकिन योजना इनके दरवाजे तक नहीं पहुंच पा रही है। वजह है जागरुकता की कमी और 2011 में सर्वे एजेंसी की तरफ से की गई गड़बड़ियां। इसका खामियाजा इंदिरा कॉलोनी और बुढ़नपुर स्थित हजारों गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। वे लोग बार - बार सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए कार्ड बनवाने जाते हैं, उन्हें जवाब मिलता है कि आपका सर्वे लिस्ट में नाम नहीं है, नतीजा उन्हें बैरंग निराश होकर अपने घर लौटना पड़ता है।
तीन साल से कोमा में जिंदगी
सड़क हादसे में घायल होने के बाद 11 मार्च 2020 से इंदिरा कॉलोनी निवासी पप्पू कोमा में है। उसका इलाज सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में चल रहा है। वह घर में कमाने वाला अकेला था, जो अभी बिस्तर पर पड़ा है। उसकी तीन बेटियां हैं। उसकी पत्नी पूरे दिन उसकी सेवा में लगी रहती है। अस्पताल में उपचार तो उसका फ्री में हो जाता है, लेकिन दवाइयों का खर्चा उसकी पत्नी नीतू नहीं उठा पा रही है। नीतू ने महीने में करीब 4 से 5 हजार रुपये दवा का खर्च आता है। अगर उसके परिवार को आयुष्मान भारत योजना का मिल जाता तो उसे दवाइयां फ्री में मिल जाती। थोड़े बहुत खर्चे वह किसी तरह मैनेज कर लेती। उसने बताया कि सर्वे लिस्ट में नाम नहीं होने के चलते उसके परिवार को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मेरा बेटा आज मेरे बुढ़ापे की बैसाखी बनकर खड़ा होता
60 वर्षीय कृष्णा ने बताया कि पैसों की कमी और सही उपचार नहीं मिलने के चलते एक साल पहले मेरे बेटे अनिल ने दम तोड़ दिया। अगर 2011 में सर्वे एजेंसी ने उचित तरीके से सर्वे किया होता तो मेरे बेटे अनिल को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलता और बेटे का उपचार और दवाइयों का खर्चा सरकार उठाती। उसे सही समय पर इलाज मिलता और उसकी किडनी खराब न होती और वह बुढ़ापे में मेरी बैसाखी बनकर मेरे साथ खड़ा होता। आज दो वक्त की रोटी के लिए दूसरों पर निर्भर हूं।
बिस्तर पर आठ माह से बीमार पति, योजना का लाभ
आठ माह से मेरे पति बिस्तर पर बीमार पड़े हैं। स्पाइन की समस्या के चलते वह बैठ नहीं पाते। उनके दोनों पैरों में छाले पड़ गए हैं। दो वक्त की रोटी के लिए हम परेशान हैं। यह कहना है कामनी देवी का। उन्होंने ने बताया कि वह अपने पति लाल किशोर के साथ 33 सालों से यहां पर हैं, लेकिन 2011 में आयुष्मान योजना के लिए किए गए सर्वे में उनका नाम तक नहीं है। सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में वह कई बार चक्कर लगा चुकी हैं, कि उनका और उनके पति का आयुष्मान योजना पहचान पत्र बन जाए और उनके पति को उचित उपचार मिल सके, लेकिन वहां सर्वे लिस्ट में नाम नहीं होने का हवाला देकर बार बार लौटा दिया जाता है।
हेड इंजरी के बाद नहीं मिला सही उपचार
सड़क हादसे में हेड इंजरी के चलते 13 साल से सलीम मोहम्मद बीमार है। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। 40 वर्षीय सलीम अपनी बुजुर्ग मां के साथ टूटे घर में रहता है। स्थानीय पार्षद उषा रानी ने बताया कि बुजुर्ग मां मेहनत मजदूरी कर लाती हैं तो घर का खर्च चलता है। उन्होंने बताया कि 2011 में सर्वे के दौरान किए गए गलतियों के चलते सलीम का भी आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया है। जिसके चलते उसे सही उपचार नहीं मिल पाया और आज वह बीमार है।
नहीं मिला योजना का लाभ
राम प्रसाद ने बताया कि वह रसौली से परेशान हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह ऑपरेशन करा सके। दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें मेहनत मजदूरी करनी पड़ती है। 4-5 बार पंचकूला सेक्टर-6 के अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाले लाभ के लिए गया था, लेकिन सर्वे लिस्ट में नाम नहीं होने के चलते बार बार लौटा दिया गया। आयुष्मान योजना का लाभ जरूरतमंद को नहीं मिल पा रहा है, ऐसी योजना का क्या फायदा है।
दोनों आंख खराब, योजना का लाभ मिले को कराऊं सर्जरी
75 वर्षीय शांति देवी ने बताया कि मेरे दोनों आंखों से नहीं दिखता। पड़ोसियों की मदत से जिंदगी चल रही है। अगर आयुष्मान योजना का लाभ मुझे मिलता तो आंखों का आपरेशन करवा पाती, लेकिन मेरा कार्ड नहीं बन पाया है। क्योंकि सर्वे लिस्ट में मेरा नाम नहीं है। बुजुर्ग ने बताया कि अगर 2011 में आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने के लिए सर्वे हुआ था, तो सर्वे लिस्ट में मेरा नाम क्यों नहीं है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सर्वे के आधार पर ही हम लोग आयुष्मान कार्ड बनाते हैं, अगर सर्वे लिस्ट में नाम नहीं है तो कार्ड नहीं बन पाएगा। 2011 में आयुष्मान योजना के तहत सर्वे हुआ था, सर्वे लिस्ट में नाम क्यों नहीं है, यह तो एजेंसी ही बता पाएगी। नए सिरे से सर्वे कब शुरू होगा, अभी कोई सरकार की तरफ से निर्देश नहीं मिला है। निर्देश मिलते ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। - डॉ. नरेंद्र मलिक, एग्जीक्यूटिव अधिकारी, आयुष्मान भारत
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