पंचकूला। जिले के बीड़ फिरोजड़ी, बीड़ बाबुपुर समेत आसपास के सात गांवों में एक हजार एकड़ खाली पड़ी जमीन पर एक समय में विश्व विद्यालय बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के सामने प्रस्ताव रखा था। उस समय विचार विमर्श भी हुआ, लेकिन मंत्री ने सहमति नहीं जताई। नतीजतन आज उसी सरप्लस जमीन के फर्जी इंतकाल और रजिस्ट्री का खेल हुआ है। इस मामले में बड़े-बड़े कई सेवारत व सेवानिवृत्त आईएएस, ब्यूरोक्रेसी, वन विभाग व राजनीति से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। मामले की भनक राज्य के मुख्य सचिव और एफसीआर (फाइनेंशिश्ल कमिश्नर रेवेन्यू) टीवीएसएन प्रसाद को लगी तो उन्होंने तुरंत पंचकूला के डीसी को पत्र जारी कर जमीन की रजिस्ट्री रोकने के आदेश दिए।
डीआरओ ने बताया विश्व विद्यालय के लिए उचित जगह बीड़ फिरोजड़ी और बीड़ बाबुपुर
बता दें कि पिंजौर निवासी एडवोकेट विजय बंसल ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री के सामने विश्व विद्यालय बनाने की मांग रखी थी। उस वक्त उन्होंने पंचकूला में जमीन उपलब्ध न होने की बात कही थी। जिसके बाद बंसल पंचकूला के पूर्व डीआरओ से मिले। उनसे पूछा कि जिले में कहीं एक हजार एकड़ जगह खाली पड़ी है तो बताएं। पूर्व डीआरओ ने कहा कि बीड़ फिरोजड़ी और बीड़ बाबुपुर सहित आसपास के गांवों में 1396 एकड़ खाली सरप्लस जमीन है, जिसके कागजात भी दिए। जहां विश्व विद्यालय बनाया जा सकता है। इसके बाद कागजात लेकर 2012 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल से पांच सदस्यीय टीम मिली और उन्हें जमीन के दस्तावेज सहित विश्वविद्यालय बनाने की मांग का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पंचकूला पूरी तरह से वंचित है। प्लस टू के बाद छात्रों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, मैनेजमेंट समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। लेकिन इन कोर्सों के लिए यहां एक भी कालेज नहीं है। यूनिवर्सिटी बनने के साथ नए कोर्स शुरू हो जाएंगे और बच्चों को चंडीगढ़ या अन्य शहरों की ओर नहीं जाना होगा, लेकिन इस प्रस्ताव पर उस वक्त ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा आज उन्हीं जमीनों के इंतकाल और रजिस्ट्री के नाम पर धोखाधड़ी का खेल चल रहा है।
यह है मामला
पंचकूला के सात गांव बीड़ फिरोजड़ी, बीड़ बाबूपुर, बहरेली, संगराणा, बरवाला, जलौली, फतेपुर वीरान में राजा भगवंत सिंह की 1336 एकड़ जमीन थी। यह जमीन सरप्लस एक्ट 1953 व 1972 के तहत थी। जिसके अनुसार मलकीयत नहीं बदली जा सकती। एक पूर्व आईएएस ने खुद और अपनी बहन के नाम वर्ष 2000-2002 में मौजा बीड फिरोजड़ी से राजा भगवंत सिंह व उनके वारिसों से परमिसिबल एरिया की करीब 1396 एकड़ जमीन खरीद ली थी। मगर तहसील में इस जमीन पर खरीद फरोख्त पर रोक लगाई हुई थी। कुछ समय पहले ही अंबाला मंडलायुक्त ने स्टे हटाकर इंतकाल दर्ज करने के आदेश जारी किया। 20 मार्च 2024 को पंचकूला के रेवेन्यू अधिकारी ने इंतकाल दर्ज कर दिया। जिसके बाद पूर्व आईएएस के नाम इस जमीन का इंतकाल दर्ज हो गया। अब यह जमीन पंचकूला सेक्टर-6 के एक व्यक्ति द्वारा खरीदी जा रही थी, लेकिन रजिस्ट्री होने से पहले मामला पंचकूला के उपायुक्त के संज्ञान में आया। उपायुक्त ने जानकारी एफसीआर (फाइनेंशिश्ल कमिश्नर रेवेन्यू) टीवीएसएन प्रसाद को दी, तो उन्होंने तत्काल बीड फिरोजड़ी की जमीन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश दिए। मामला 14 एकड़ जमीन का है। इस 14 एकड़ जमीन का सौदा महज 11 करोड़ रुपये में हुआ था, पांच करोड़ रुपये में इसकी रजिस्ट्री करवाने की कोशिश की गई, जबकि मार्केट रेट के हिसाब से यह करीब 200 करोड़ से अधिक का मामला है। अब एफसीआर पंचकूला बीड़ फिरोजड़ी समेत 7 गांवों में हुई भूमि की खरीद-फरोख्त की जांच करेगा।