चंडीगढ़। बर्खास्त पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल को आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस अधिकारी ही नशा माफिया को पनाह देने लगेंगे तो समाज पर इसका प्रभाव भयावह होगा। राजजीत के खिलाफ विजिलेंस ने 20 अप्रैल को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में अब राजजीत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। एनडीपीएस के मामले में राजजीत ने हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी और वहां से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी। 18 अक्तूबर को उन्हें पंजाब पुलिस की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अंतरिम जमानत मिली थी।
ऐसे में उन्होंने आय से अधिक संपत्ति के मामले में राहत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अब इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। याची ने दलील दी थी कि मुख्यमंत्री की मंजूरी से गृह विभाग के सचिव ने डीजीपी को पत्र लिख याची को आईपीएस के दो खेमों के बीच की रस्साकस्सी का शिकार बताया था। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रुचि लेते हैं तो इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभी आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच जारी है और यह पता लगाना बाकी है कि पैसा गंभीर अपराधों में जांच को बाधित करने, ऐसे अपराधों में आरोपियों की मदद करने, ड्रग डीलरों को शरण देने या फिर सीधे ड्रग लेनदेन के लिए लिया गया था। यह केवल आय से अधिक संपत्ति का मामला नहीं है, अगर पुलिस अधिकारी ही नशा माफिया को पनाह देने लगेंगे तो समाज पर इसका असर बहुत भयावह होगा।