हरियाणा को कोरोना से बचाने के लिए क्षेत्र में उतरे शहरी स्थानीय निकाय के सभी कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी समस्या को हल करने के लिए सरकार ने 300 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि कि हमारे सभी कर्मचारी हमारे लिए सर्वप्रिय हैं। इस महामारी में कार्यरत कर्मचारियों को किसी भी तरह की आर्थिक दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। उनके खाते में समय पर वेतन पहुंचाया जाएगा।
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इसके अलावा मंत्री अनिल विज ने सभी अधिकारियों को आदेश किए हैं कि दूसरों की सुरक्षा करने से पहले सभी कर्मचारी स्वयं को सुरक्षित करें। इसके लिए उन्हें सुरक्षा के लिए मास्क, ग्लब्स सहित अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसके साथ ही 31 मार्च को रिटायर होने वाले कर्मचारियों की सेवाएं भी एक महीने के लिए बढ़ा दी गई हैं।
गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि कोरोना की रोकथाम के लिए सभी नगर निगमों के आयुक्तों और उपायुक्तों को पालिकाओं की देखरेख के लिए 18 तालमेल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। सभी उच्च अधिकारियों का क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर निगरानी के लिए वाटसएप ग्रुप बनाया गया है। सभी बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी कार्यालयों सहित सभी क्षेत्रों में सेनिटाइजेशन करवाया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के सभी 87 पालिकाओं में 22440 सफाई कर्मचारी कार्यरत है।
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श्रमिकों के खान पान की व्यवस्था हो रही
अनिल विज ने बताया कि आपदा के दौरान फंसे हुए बेसहारा लोगों, दूसरे राज्यों से आए श्रमिकों के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है। उनके ठहराव के लिए प्रदेश में 114 ठहराव केंद्र स्थापित किए गए हैं। जिसमे नगर पालिकाओं द्वारा सफाई, शौचालय और स्नानघर की व्यवस्था की गई है।
विज ने बताया कि स्थानीय निवासियों के लिए निर्वाचित सदस्यों, समाजसेवी संस्थाओं व स्थानीय कल्याण संगठनों द्वारा 46,765 परिवारों को राशन और सब्जियों की व्यवस्था करवाई जा रही है। इन्हें एक बार मे सप्ताह भर का राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अलावा पालिका क्षेत्रों में भी 44,026 लोगों को भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
87 पालिकाओं में स्थापित किए कंट्रोल रूम
मंत्री अनिल विज ने बताया कि सभी 87 पालिकाओं में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं और आम नागरिक को सुविधा प्रदान करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। विज ने बताया कि इस आपदा में लोगों की समस्या को दूर करने के लिए पानी व सीवरेज के बिलों, संपत्ति कर, तहबाजारी, लाइसेंस फीस तथा पालिकाओं की दुकानों का किराया जमा कराने की देय अविधि को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
कोरोना से लड़ते हुए कर्मचारी की मौत पर दस लाख का बीमा
सरकार ने फैसला लिया है कि नगर निगम, नगर कौंसिल व नगर परिषद के किसी कर्मचारी की काम करते हुए यदि कोरोना की वजह मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रितों को 10 लाख का बीमा दिया जाएगा।
कोरोना रिलीफ फंड में एक दिन की पेंशन देंगे पेंशनर्स
कोरोना से निपटने के लिए कर्मचारियों के बाद पेंशनर्स भी आगे आए हैं। उन्होंने अपनी एक दिन की पेंशन देने का निर्णय लिया है। वे मुख्यमंत्री राहत कोष में पेंशन जमा कराएंगे। सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष आरसी जग्गा व महासचिव राजेन्द्र सिंह अहलावत ने बताया कि सोमवार को रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों व विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स की मार्च महीने की पेंशन से एक दिन की कटौती करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि रिटायर्ड कर्मचारी संघ देश के किसी भी हिस्से में आने वाली प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों के साथ हमेशा खड़ा रहता है।
छात्रों, मजदूरों से घर खाली करवाया तो खैर नहीं
लॉकडाउन के दौरान हरियाणा में यदि किसी भी किराएदार ने घर पर रह रहे छात्रों या प्रवासी मजदूर परिवारों पर घर खाली करने का दबाव बनाया तो उनकी खैर नहीं है। ऐसे किरायेदारों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ-साथ जिन घरों में प्रवासी मजदूर बतौर किराएदार रह रहे हैं। उन सभी मकान मालिकों को भी निर्देश हैं कि वे इन मजदूरों से अगले एक महीने का किराया नहीं वसूलेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत और भी कई दिशा निर्देश हरियाणा सरकार समेत अन्य राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की बड़ी तादाद में हो रही मूवमेंट को लेकर बेहद चिंतित है। इस मूवमेंट को देशभर में किसी भी तरह रोका जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों का जमावड़ा न रहे। इसे लेकर कई तरह के निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को जारी किए हैं। राज्य सरकारों के अधीनस्थ सभी जिलों के जिला उपायुक्तों व ज़िला पुलिस अधीक्षकों को डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत इन विभिन्न निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना है।
सभी राज्य सरकारों को यह भी निर्देश है कि वे प्रवासी मजदूरों को जागरूक करें और उन्हें जहां वे रह रहे हैं, वहीं रुकने को कहें। जरूरत हो तो उनके स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग कराएं और उन्हें 14 दिन की मेडिकल निगरानी में रखें। राज्य सरकारें यह भी सुनिश्चित करवाएंगी कि उनके क्षेत्र में सभी उद्योग और कारोबारी अपने अधीनस्थ प्रवासी मजदूरों को वेतन भी दें। इस दौरान उनके प्रतिष्ठान और दुकानें जितने दिन भी बंद रही हैं, उन दिनों का भी वेतन न काटा जाए। प्रवासी मजदूरों से जुड़े सभी निर्देशों का पालन जिला उपायुक्त व जिला पुलिस अधीक्षक अपने व्यक्तिगत दायित्व के तहत गंभीरता से करेंगे।