चंडीगढ़। आदमपुर उपचुनाव के बाद अब सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में उतर गए हैं। 9 नवंबर को जिला परिषद और ब्लॉक समिति पदों के चुनावों को लेकर दलों ने अलग-अलग रणनीति तैयार कर ली है। इसी नीति के तहत अपने-अपने पार्टी के नेताओं को जिलों में जिम्मेदारी दी गई है। सभी दल जिलों में जिला परिषद और ब्लॉक समिति में अपने चेयरमैन बनाने की फिराक में हैं। इसलिए अधिक से अधिक सदस्यों को जीत की दहलीज तक लाने के लिए जमीनी स्तर पर मैदान में उतर गए हैं।
प्रथम चरण के चुनावों में सभी राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता अधिक समय नहीं दे पाए। उस समय वरिष्ठ नेताओं ने पूरी ताकत आदमपुर में जीत के लिए लगाई हुई थी। अब आदमपुर का रण भाजपा जीत चुकी है और पंचायत चुनावों में इस जीत को बरकरार रखना चाहेगी। वहीं, हार को भुलाकर विपक्षी दल भी पंचायत चुनावों में सक्रिय हो गए हैं। अब दूसरे चरण के लिए नौ जिलों अंबाला, चरखी दादरी, गुरुग्राम, करनाल, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, रोहतक, सिरसा और सोनीपत में 9 नवंबर को ब्लॉक समिति व जिला परिषद और 12 नवंबर को पंच और सरपंच के चुनाव होने हैं। नई ऊर्जा के साथ उतरे नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्र में अपनी पार्टियों को मजबूत करने के लिए जनसंपर्क बढ़ा दिया है। साथ ही जिला वार जिला प्रभारियों से प्रत्याशियों के बारे में फीडबैक लिया जा रहा है। भाजपा ने पंचायत चुनावों में जीत हासिल करने के लिए सांसदों और अपने वरिष्ठ नेताओं को जिलों की कमान सौंप रखी है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ लगातार जिला प्रभारियों से संपर्क बनाए हुए हैं। इसके अलावा, एडवोकेट वेदपाल समेत अन्य नेता जिला वार रिपोर्ट ले रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ रही है, लेकिन वह अपने समर्थकों और निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन कर रही है। आदमपुर में हार के बाद कांग्रेस पंचायत चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। प्रत्याशियों ने भी अब पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ हाजिरी तेज कर दी है। आप के हरियाणा प्रभारी डॉ. सुशील गुप्ता और उनकी टीम, इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला समेत अभय चौटाला मैदान में उतर गए हैं। इनेलो के प्रवक्ता राकेश सिहाग ने कहा कि फिलहाल पार्टी पंचायत चुनावों में जुटी हुई है। आदमपुर उपचुनाव की हार की समीक्षा पंचायत चुनावों के बाद की जाएगी। पार्टी का पूरा फोकस पंचायत चुनावों पर ताकि, अपने कार्यकर्ताओं को जीत दिलाई जा सके।
प्रचार थमा, जोड़ तोड़ तेज
दूसरे चरण के पंचायत चुनावों को लेकर सोमवार शाम को प्रचार थम गया है। अब केवल जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है। एक दूसरे दल के मतदाताओं में सेंध लगाने के लिए पार्टी कार्यालयों पर रणनीति तैयार की जा रही है। वहीं, फीडबैक के आधार पर पार्टियों के वरिष्ठ नेता अपने कार्यालयों से ही मतदाताओं को लगातार फोन कर रहे हैं। प्रत्याशी घर घर जाकर रुठे हुए मतदाताओं को मनाने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, तीसरे चरण में होने वाले चार जिलों के लिए भी अभी से राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है।
12,519 सीटों के लिए होगा 35 हजार दावेदारों में मुकाबला
दूसरे चरण के चुनावों में कुल 12,519 सीटों पर चुनाव होगा। इसके लिए 35,229 उम्मीदवारों में मुकाबला होगा। इनमें 19,704 पुरुष हैं और 15,525 महिला दावेदार हैं। बता दें कि दूसरे चरण में कुल 125 सरपंच और 16,345 सर्वसम्मति से चुने जा चुके हैं। जिला परिषद की 158 सीटों के लिए 1183, ब्लाक समिति की 1199 सीटों पर 4770, सरपंच के 2555 पदों के लिए 10,858 और 8607 पंच पदों के लिए 18,418 उम्मीदवारों में मुकाबला होगा।