संवाद न्यूज एजेंसी
बठिंडा। सीबीआई अधिकारी बनकर एक एडवोकेट को आनलाइन हाउस अरेस्ट करके 90 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। फर्जी सीबीआई अधिकारियों ने सीनियर एडवोकेट को 14 दिन तक हाउस अरेस्ट रखा। उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने की धमकी देकर उनसे ठगी की गई। थाना साइबर सेल पुलिस ने पीड़ित एडवोकेट की शिकायत पर अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी है।
सौ फीट रोड नजदीक दशमेश पब्लिक स्कूल निवासी एडवोकेट हरिंदर सिंह ने बताया कि बीती 19 अगस्त 2025 को उनके व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज आया और उसके बाद काल। एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को सीबीआई का एएसआई विजय खन्ना बताया और कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के संबंध में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में पता चला है कि इस धोखाधड़ी में उनके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया है। नकली सीबीआई एएसआई ने कहा कि अब सीबीआई के उच्च अधिकारी उनसे वीडियो काल से पूछताछ करेंगे।
इसके बाद उन्हें एक अन्य नंबर से एक वीडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की वर्दी में बैठा दिखाई दे रहा था। नकली सीबीआई अधिकारी ने एडवोकेट से उनका नाम और पता पूछा, फिर उन्हें अपने आधार कार्ड की एक प्रति भेजने के लिए कहा, जिस पर एडवोकेट ने उन्हें अपने आधार कार्ड की एक फोटो कॉपी भेज दी। उक्त व्यक्ति ने कहा कि आपके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें सीबीआई आपको आपके घर में हाउस अरेस्ट करती है। फर्जी सीबीआई अधिकारी ने कहा कि जब तक हमारी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आप परिवार के किसी सदस्य या किसी भी व्यक्ति से बात नहीं कर पाएंगे। अगर ऐसा किया तो आपको आपके घर से गिरफ्तार कर लिया जाएगा, जिससे आपकी सामाजिक रूप से बेइज्जती होगी। पीड़ित एडवोकेट हरिंदर सिंह ने बताया कि 19 अगस्त 2025 से 25 अगस्त 2025 तक उक्त फर्जी सीबीआई अधिकारी उन्हें कई बार व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए धमकाता रहा। 25 अगस्त को उक्त व्यक्ति ने वकील से बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी और अन्य कीमती सामान की जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उक्त व्यक्ति ने कहा कि उसे सिक्योरिटी के तौर पर 28 लाख रुपये ट्रांसफर करने होंगे। पीड़ित वकील ने बताया कि उन्होंने डर के मारे ऐसा करने के लिए उक्त व्यक्ति को अपनी सहमति दे दी, जिसने कहा कि अब सीबीआई अधिकारी आपसे बात करेंगी। इसके बाद एक अनजान लड़की ने उन्हें व्हाट्सएप पर कॉल किया और आईसीआईसीआई बैंक के खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा। ठग इतना शातिर था कि खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाली उक्त लड़की ने डीसीपी साइबर के हस्ताक्षर से वकील को 28 लाख रुपये की रसीद भी भेजी। इसके बाद ठगों ने वकील को कोर्ट की फर्जी जमानत और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज भेजे। इस तरह ठगों ने वकील को 19 अगस्त 2025 से 1 सितंबर 2025 तक हाउस अरेस्ट रखा और अलग-अलग खातों में 90 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए।
हरिंदर सिंह ने 25 अगस्त 2025 को 28 लाख रुपये, 27 अगस्त को 41 लाख रुपये, 28 अगस्त को 5.5 लाख रुपये, 29 अगस्त को 4 लाख रुपये जमा किए। इसी दिन दो ट्रांजेक्शन के माध्यम से उसी खाते में 5.5 लाख रुपये और जमा किए गए। 30 अगस्त 2025 को वकील ने अपने खाते से इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए, उसी दिन 5 लाख रुपये फिर ट्रांसफर किए।
ऐसे लगा पता
नकली सीबीआई अधिकारी वकील से अभी भी और पैसे मांग रहा था, जब वकील ने अपनी बेटी से उधार पैसे मांगे, तो घटना का खुलासा हुआ। वकील हरिंदर सिंह ने इस मामले में अपनी बेटी अमनदीप कौर से बात की। जब वह अपने पति के साथ बठिंडा में अपने पिता के वकील के घर पहुंची, तो उसने उन्हें सीबीआई अधिकारियों के साथ हुई चैट दिखाई, जिसके बाद इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।