हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि महामारी के प्रकोप को समाप्त करने के लिए कोई भी व्यक्ति अपने प्रयास में किसी भी प्रकार की कमी न छोड़ें। कोरोना से अपने पूरे प्रयास से लड़ने वालों का नाम इतिहास में लिखा जाएगा। संकट के समय में गरीब व असहाय लोगों को गोद लेकर उनका पेट भरें। करनाल के लोगों ने ‘अडोप्ट-ए-फेमिली’ अभियान शुरू किया है। अब तक लगभग 400 लोगों ने अपना योगदान दिया है। उन्होंने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि आप भी किसी न किसी प्रकार से गरीब व असहाय लोगों की मदद कर सकते हैं।
मकान मालिक होने के नाते दो माह का किराया ऐसे लोगों से नहीं लेना चाहिए। मुख्यमंत्री प्रदेश वासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राणा सांगा और बाबर की फौजों के बीच खनवा युद्ध का प्रसंग सांझा करते हुए कहा कि ‘सभी मेवाती भाइयों से अपील है, कोरोना की लड़ाई सब मिलकर लडें, जैसे शहीद हसन खां मेवाती ने राणा सांगा के साथ खड़े होकर बाबर की फौजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मेवात यदि कोरोना की लड़ाई में मिलकर चलता है तो निश्चित रूप से इसमें किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हैं कि मेवात से इस बीमारी को भगा न सकें।
नूंह जिला के लोग इस लड़ाई को लडऩे का दम दिखाएं, इस लड़ाई में पीछे न रहें’’। मुख्यमंत्री ने मौलवियों से आग्रह किया कि वे समाज के लोगों को समझाएं कि वे बाहर न निकलें और यदि कोई बाहर से आया हुआ है तो वे अपना टेस्ट करवाएं व 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड पूरा करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा के सभी 2.75 लाख कर्मचारी हरियाणा की 2.75 करोड़ जनता के लिए काम करेंगें तो काम आसान हो जाएगा। गांवों में ठीकरी पहरा, राहत शिविर लगाए जा रहे हैं। गोशालाओं में भी सरकार व गांवों के लोग भूसा व अन्य खाद्य सामग्री पहुंचाने में लगे हैं।
सरपंचों ने भी अपना मानदेय रिलीफ फंड में देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सौ फीसदी वेतन देने वाले कर्मचारियों में से चार के साथ ऑनलाइन बात भी की। अंबाला के पथरेड़ी गांव के नरेश समूह डी के कर्मचारी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि अपने एक माह का वेतन कोरोना रिलीफ फंड में दिया है। वे चाहते हैं कि वे इस महामारी में तन-मन-धन से लोगों की सहायता करें। नरेश ने बताया कि उनके परिवार में पिता व पत्नी ने उन्हें प्रेरित किया कि जब नौकरी नहीं थी तब भी गुजारा हो रहा था।
स्टाफ नर्स शशि बाला ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘‘उन्होंने भी इस संकट की घड़ी में अपना एक माह का वेतन कोरोना रिलीफ फंड में दिया है क्योंकि वे अस्पताल में काम करती हैं और अस्पताल में गरीबों को देखती है कि कई लोगों के पास कुछ भी नहीं होता। उन्होंने पति को बिना पूछे यह मन बना लिया था कि वे अपना एक माह का वेतन फंड में देंगी। सिपाही रवि ने मुख्यमंत्री से बातचीत करते हुए बताया कि पढाई, ईमानदारी के गुण, पुलिस ट्रेनिंग की वजह से ही उनके मन में यह था कि इंसानियत के लिए कुछ करना चाहिए।
जेबीटी सरला देवी ने बताया कि उन्होंने चुपचाप किसी से पूछे बिना अपनी शत-प्रतिशत सैलरी कोरोना रिलीफ फंड में दी है। उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि सभी घरों में अपने आपको सुरक्षित रखें, आप स्वयं सुरक्षित हैं, तो देश सुरक्षित हैं।