चंडीगढ़ में कैब-टैक्सी सेवा दे रही एप बेस सर्विस प्रोवाइडर उबर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। हाईकोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन ने विश्वास दिलाया कि फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कंपनी की याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
शहर में ओला-उबर के पास ही कैब चलाने का लाइसेंस था, जो 4 नवंबर को एक्सपायर हो गया था। दोनों कंपनियों की शहर में चार हजार से ज्यादा कैब चल रही हैं, जिनमें से अधिकतर मोहाली व पंचकूला में पंजीकृत हैं। दोनों एग्रीगेटर कंपनियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया है लेकिन एंट्री टैक्स का करीब छह करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने लाइसेंस जारी नहीं किया है।
कंपनियों का पिछले काफी समय से कहना है कि कैब्स के चालक ही एंट्री टैक्स चुकाएंगे, जबकि कैब चालकों का कहना है कि एसटीए के साथ एग्रीगेटर कंपनियों का समझौता हुआ है, इसलिए एंट्री टैक्स का पैसा भी कंपनियों को ही चुकाना चाहिए। इस बीच कुछ महीने पहले एसटीए ने कई चालकों का चालान भी काटा था। इसके बाद चालकों ने एसटीए का घेराव भी किया था। मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता कंपनी उबर का लाइसेंस एक्सपायर होने से पहले ही उन्होंने एसटीए को इसे रिन्यू करने के लिए आवेदन दिया था लेकिन एंंट्री टैक्स बकाया होने की दलील देते हुए इसे रिन्यू नहीं किया गया। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ उबर ने हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट में प्रशासन ने विश्वास दिलाया कि याचिका लंबित रहते प्रशासन उबर के खिलाफ फिलहाल कार्रवाई नहीं करेगा। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर उबर की याचिका पर प्रशासन को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।