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अनियमितताएं बरतने पर तीन एचसीएस समेत अनेक अधिकारी नपेंगे

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चंडीगढ़/पलवल। दादरी-मुंबई वेस्टर्न डेडिकेटिड फ्रेट रेलवे कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत जमीन में अनियमितताएं बरतने पर तीन एसचीएस समेत अनेक अधिकारी नपेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जांच में दोषी पाए गए सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को मंजूरी दे दी है।
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अतिरिक्त उपायुक्त पलवल सतेंद्र दूहन के नेतृत्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अनियमितताएं बरतने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। प्रदेश सरकार ने जांच समिति की रिपोर्ट की पड़ताल राजस्व परामर्शदाता सेवानिवृत्त एचसीएस राजकुमार गर्ग से भी करवाई है। उनके रिपोर्ट पर मुहर लगाने के बाद मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दोषी एचसीएस अधिकारियों तत्कालीन एसडीएम कंवर सिंह, जितेंद्र कुमार व नरेश के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दरअसल, यूपी के दादरी से नवी (मुंबई) रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए पलवल जिले के करीब 10 गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई थी। गांव असावटी, जटौला, मैदापुर, पृथला में रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन का अवार्ड घोषित कर दिया गया। रेलवे की नीति के अनुसार जिस किसान की जमीन अधिग्रहीत हुई, उसे सरकारी नौकरी या पांच लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाने थे। पांच लाख रुपये लेने के लिए 6, 7, 12, 15 और 30 गज के टुकड़ों में की गई
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रजिस्ट्रियों में करीब 400 लोग शामिल कर लिए गए। जमाबंदी में जहां एक व्यक्ति जमीन का मालिक है, वहीं रजिस्ट्री में 30 से 40 लोगों को शामिल किया गया। अधिग्रहीत जमीन का अवार्ड घोषित करते समय एक नंबर पर एक व्यक्ति के नाम अवार्ड घोषित किया जाना था और राशि बांटी जानी थी। छह गज जमीन का 45 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब
से मुआवजा 31 लोगों को देना था। रेलवे नियमों के तहत सभी 31 लोगों को पांच-पांच लाख के हिसाब से डेढ़ करोड़ रुपये अवार्ड घोषित कर दिया। करीब 100 गज जमीन के लिए 400 मालिकों को साढे़ 22 करोड़ रुपये अवार्ड घोषित किया गया। रेलवे अधिकारियों को इतनी मोटी राशि जारी करने के दौरान शक हुआ और मामले की शिकायत मुख्य्य्मंत्री से की गई।
अनियमितताएं बरतने में 20 अधिकारी, कर्मचारी पाए गए संलिप्त
मामले का खुलासा होने पर जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त सतेंद्र दूहन के नेतृत्व में जांच समिति
गठित की गई। समिति में सीईओ जिला परिषद अमित कुमार और डीआरओ रामफल कटारिया को
शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से पहले मंडलायुक्त संजय जून व डीसी फरीदाबाद ने भी दस्तावेजों की जांच की। समिति ने तीन एसडीएम, पांच तहसीलदार, चार रजिस्ट्री क्लर्क सहित 20 लोगों को मामले संलिप्त पाया था। मामले की जांच रिपोर्ट समिति ने सीएम को सौंप दी थी। राजस्व परामर्शदाता ने अपनी पड़ताल के बाद नौ अप्रैल 2021 को रिपोर्ट कार्रवाई केलिए मुख्यमंत्री को प्रेषित की थी।
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जांच समिति की इन सिफारिश के आधार पर होगी कार्रवाई
-एसडीएम कंवर सिंह को भारी अनियमितताएं बरतने पर चार्जशीट किया जाए और अंडर रूल-7 के तहत बड़ा जुर्माना लगाएं।
-एसचीएस जितेंद्र कुमार-चतुर्थ व नरेश से पहले स्पष्टीकरण मांगा जाए और बाद में विभागीय कार्रवाई करें
-सब रजिस्ट्रार, संयुक्त सब रजिस्ट्रार प्रदीप देसवाल, अशोक कुमार, रोहताश, प्रेम प्रकाश से भी डीड पंजीकरण को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाए ।
-क्लर्क, डाटा एंटी ऑपरेटर व रीडर के खिलाफ मंडलायुक्त व डीसी उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।
-रेलवे अधिकारियों की संलिप्तता को भारतीय रेलवे के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाएं।
-भूमि अधिग्रहण के मामले में डीसी योग्य पटवारियों को ही नियुक्त करें।
-जिन पटवारियों, अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों ने अधिगृहीत भूमि का कुछ हिस्सा खरीदा है उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अमल में लाने पर भी विचार करें।
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