पंचकूला। बुर्जकोटिया गांव में ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां, दो दिन की नवजात बच्ची को छह डिग्री तापमान में झाड़ियों में छोड़ गई। यहां बच्ची रातभर से सर्दी में तड़प रही थी। इसके बाद सुबह 11 बजे पास में ही काम कर रहे मजदूरों ने उसके रोने की आवाज सुनी तो मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल के निक्कू वाॅर्ड में उसे भर्ती कराया है। यहां उसकी हालत साामान्य बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक अमरावती पुलिस चाैकी क्षेत्र के गांव बुर्जकोटिया में क्रशर पर काम करने वाले मजदूर विष्णु, कमलेश को झाड़ियों में नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने इसकी जानकारी पिंजौर पीएचसी में काम करने वाली आशा वर्कर हरप्रीत कौर को फोन पर दी। हरप्रीत कौर ने पीएचसी के डॉक्टरों को जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर डायल 112 नंबर पर फोन किया गया।
फोन करने के साथ ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस मौके पर पहुंच गई। फिलहाल नवजात सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में भर्ती है। यहां डाॅक्टरों की एक टीम नवजात की निगरानी कर रही है। डाॅक्टरों ने बताया कि बच्ची की उम्र दो दिन की लग रही है। उसकी सभी प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट सामान्य आई है। फिलहाल 24 घंटे की निगरानी में रखा गया है। नवजात को झाड़ियों में छोड़ने के मामले में पिंजाैर थाने की अमरावती चाैकी के एएसआई सुखबीर ने बताया है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 93 के तहत केस दर्ज किया है।
ठंड के कारण उखड़ने लगी थी सांस
बच्ची को सुबह किसी ने बुर्जकोटिया गांव की झाड़ियों में फेंक दिया था। सूचना मिलने पर दोपहर करीब 12 बजे पुलिस व एंबुलेंस माैके पर पहुंची। यहां से उसे सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में ऑक्सीजन लगाने के बाद नवजात की सेहत में सुधार हुआ और वह ठीक से सांस लेने लगी। डाॅक्टरों ने बताया कि रात का पारा करीब 6 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में पता नहीं बच्ची कब से खुले आसमान के नीचे थी। इस कारण सर्दी में रहने के कारण उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। अब वह डाॅक्टरों की देखरेख में है। नवजात के ब्लड और अन्य सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आने का इंतजार है।
बड़ा सवाल! मां ने ऐसा क्यों किया?
यह फोटो देखकर आपके मन में दया और जिम्मेदारों के प्रति घृणा के भाव एक साथ आ रहे होंगे। इस अबोध के बारे में सोचिए। जब यह बड़ी होगी और इसे अपनी कहानी पता चलेगी तब गर्मी के माैसम में भी रूह कांप उठेगी। मगर क्या इसके मन में सवाल नहीं आएगा कि जिम्मेदारों ने उसकी मां को क्यों नहीं ढूंढा? मां ने ऐसा क्यों किया ? परिवार ऐसे निर्दयी क्यों हो गया? उसकी मां की कहानी को दोहराने से रोकने की जिम्मेदारी काैन लेगा ? उसके जहन में एक सवाल हमेशा काैंधता रहेगा कि मां तो अपने बच्चों के लिए जान पर खेलकर दुनिया से लड़ जाती है, लेकिन मुझे मरने के लिए झाड़ियों में क्यों फेंक दिया गया।
बच्ची की हालत नॉर्मल है। डॉक्टरों की टीम ने बच्ची की देखरेख की है। इसके साथ ही उसे दूध की डाइट दी गई है। उसके सभी टेस्ट करवा लिए गए हैं। बच्ची को जल्द ही गोद देने की प्रक्रिया के लिए शिशु गृह भेजा जाएगा। - डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर -6