बोले- खेती हानि का सौदा नहीं, दिल्ली की कलम बेईमान है
लक्खोवाल बोले, मोर्चे के बाद मांगों पर आगे नहीं बढ़ी सरकार, 22 को बैठक करके अगले संघर्ष पर लेंगे फैसला
किसान नेता चौधरी घासी राम नैन की 9वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी, ब्यूरो
चंडीगढ़। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार को देशव्यापी किसान आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेती हानि का सौदा नहीं है बल्कि दिल्ली की कलम बेईमान है। टिकैत ने यह बात सेक्टर-35 के किसान भवन में प्रेसवार्ता के दौरान कही। वह किसान नेता चौधरी घासी राम नैन की 9वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे और उनकी किताब का विमोचन भी किया।
राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की कोई मांग नहीं मानी है। प्रधानमंत्री भाषणों में किसानों की बात करते हैं पर उनके लिए काम नहीं करते। सरकार के साथ 12 दौर की बातचीत 22 जनवरी 2021 के बाद नहीं हुई। उन्होंने किसान संगठनों से दिल्ली जाने के लिए छोटे और हल्के आंदोलन का आह्वान न करने को कहा। टिकैत ने चिंता व्यक्त की कि पंजाब में आंदोलन कम हो रहा है जबकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा से युवा अधिक संख्या में आंदोलनों में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि मिट्टी से सीधा संबंध रखने वाले ही आंदोलन से जुड़ेंगे।
किसानों की प्रमुख मांगें :
किसान नेताओं ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की मांग रखी। उन्होंने फसलों के दाम सी2 प्लस 50 प्रतिशत के फार्मूले पर तय करने को कहा। किसानों की कर्ज माफी और बिजली बिल वापस लेने की भी मांग की गई। गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की बात कही गई। किसान पेंशन योजना लागू करने और नकली बीज व कीटनाशकों पर रोक लगाने की मांग भी उठी। स्मार्ट मीटर हटाने की मांग भी इस दौरान उठाई गई।
सरकार पर आरोप और चिंताएं :
टिकैत ने चिंता व्यक्त की कि अब क्षेत्र और जाति के नाम पर भी किसान संगठन बनेंगे लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा एक विचारधारा आधारित संगठन है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेती हानि का सौदा है, तो शहर के लोग खेत क्यों खरीद रहे हैं। मुंबई के लोग महाराष्ट्र और गुजरात के गांवों में जमीन खरीद रहे हैं। यह सोचने का विषय है कि गांव के लोग अपनी जमीन क्यों बेच रहे हैं।
लक्खोवाल का अल्टीमेटम :
किसान नेता हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने बताया कि पिछले दिनों चंडीगढ़ में किसानी मांगों को लेकर मोर्चा लगाया गया था। सरकार ने आश्वासन के बावजूद 15 दिन बाद भी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो 22 सितंबर को एक बैठक की जाएगी। इस बैठक में यूनियन आगे के संघर्ष की रणनीति तैयार करेगी। श्रद्धांजलि सभा में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि पहुंचे थे।