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कमरों में कैद मोरनी किले का इतिहास

Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
Panchkula
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पंचकूला। मोरनी के ऐतिहासिक किले की यादगार कमरों में कैद है। इस किले की पुरानी तस्वीरें, जो इसके इतिहास की गवाह हैं, उसे कमरों में बंद कर रखा गया है। इन कमरों में काफी दिनों से ताला लटक रहा है। कमरों में बड़ा-सा ताला लटकता देख पर्यटक मुंह फेर लेते हैं। पर्यटकों को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि इन कमरों में किले का खजाना यानी तस्वीरें बंद है। जब पुराने किले की तस्वीरे ही नहीं हैं तो उसके इतिहास के बारे में क्या पता चलेगा? इससे साफ जाहिर होता है कि किले की देखरेख नहीं की जा रही है।
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इसकी तस्दीक इस बात से भी होती है कि कई बार तो किले का मुख्य दरवाजा ही बंद रहता है। सेक्टर-20 में रहने वाले साहित्यकार वैभव सिंह ने बताया कि पिछले दिनों वे किले में घूमने गए तो किले के मेन गेट पर ताला लगा था। वे काफी देर तक इधर-उधर घूमते रहे। उन्हें लगा कि कुछ देर में ताला खुल जाएगा। काफी इंतजार करने के बाद जब ताला नहीं खुला तो वे पीछे के रास्ते से किले में पहुंचे। बताया जा रहा है कि तीन साल पहले रेवोनेशन पर किले में करीब 32 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन देखरेख नहीं होने से यह रुपये भी पानी में चले गए।
कोट
तीन वर्ष पहले मैं जब वहां गया था, तो वह काफी खूबसूरत लग रहा था। किले के अंदर कमरों में पुराने किले की तस्वीरें थीं, जो इतिहास को दर्शा रही थीं। जब मैं दोबारा मई में गया तो जिन कमरों में किले की पुरानी तस्वीरें लगी थी, उनमें ताला जड़ा था।
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देश निर्मोही, साहित्यकार
यह ऐतिहासिक किला हमारी संस्कृति, सामूहिक स्मृति और सामुदायिक भावना से जुड़ा है। हरियाणा के संदर्भ में देखा जाए तो ऐतिहासिक आर्किटेक्चर कम हैं। लिहाजा इनकी देखरेख सही तरीके से होनी चाहिए।
प्रदीप कासनी, लैंड रिकार्ड डायरेक्टर पंचकूला
कोट
जब भी किसी हेरिटेज साइट का रेनोवेशन किया जाए तो उसके इतिहास को ध्यान में रखा जाए। इस कार्य को इंजीनियरों और ठेकेदारों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। इसके लिए इतिहासकारों की टीम गठित करनी चाहिए।
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डा. पंकज, एडवोकेट हाईकोर्ट
मोरनी हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन है। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा यह किला काफी महत्वपूर्ण है। इस ऐतिहासिक धरोहर पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
एमएम जुनेजा, इतिहासकार
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