महिलाएं हिंसा के खिलाफ उठाएं आवाज
पीयू के मानवाधिकार व कर्तव्य केंद्र की ओर से महिला दिवस मनाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानवाधिकार व कर्तव्य केंद्र की ओर से पंजाब यूनिवर्सिटी में महिला अधिकार दिवस मनाया गया। केंद्र की चेयरपर्सन डॉ. नमिता गुप्ता ने इस दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक समतामूलक समाज के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो समाज भड़काने का काम करे वहां संतुलन कायम करना आसान नहीं है। एसिड अटैक महिलाओं के खिलाफ हिंसा के सबसे जघन्य रूपों में से एक है। अब समय आ गया है कि महिलाएं इन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं।
पंजाब और हरियाणा उच्चन्यायालय के न्यायमूर्ति एबी चौधरी ने बताया कि महिलाओं को हिंसा से बचाने के लिए कई कानून व नीतियां बनाई गई हैं, लेकिन जमीनी वास्तविकता इससे अलग है। राज्यों को इनका पालन करना चाहिए। शीघ्र परीक्षण और सहायता का अभाव अभी भी बना हुआ है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए कानूनों में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया। डीयूआई शंकरजी झा ने कहा कि मजबूत प्रजातियां हमेशा कमजोर लोगों को नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं। एक सभ्य समाज को कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए। दिल्ली से आईं एसिड अटैक पीड़ित ऋतु सैनी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 18 साल की उम्र में उस पर एसिड अटैक किया गया। चचेरे भाई ने इसके लिए किसी अन्य व्यक्ति को पैसे दिए थे। वह एक वालीबॉल खिलाड़ी थीं। उन्होंने ऐसे हमलों के खिलाफ आवाज उठाई। संस्था चलाई और लोगों को जागरूक कर काफी हद तक ऐसे हमलों को रोका भी। लखनऊ, आगरा में कई घटनाएं भी रुकीं। वीणा कुमारी, राज्य निदेशक, मानवाधिकार कानून नेटवर्क ने कहा कि एसिड अटैक महिलाओं के खिलाफ होने वाली चरम हिंसा है। उन्होंने कई उदाहरण दिए। नवप्रीत कौर, संस्थापक सदस्य स्टॉप सेल एसिड अभियान ने भी अनुभव साझा किए। इस मौके पर डॉ. उपनीत कौर मंगत, प्रो. राजेश गिल, महावीर सिंह, सदस्य सचिव, राज्य विधिक सेवा ने भी विचार रखे।