साइबर थाने के लिए गृह मंत्रालय को भेजा प्रपोजल
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़।
देश की स्मार्ट पुलिस होने का दावा करने वाली यूटी पुलिस के पास साइबर क्राइम से लड़ने के लिए स्मार्ट संसाधन ही नहीं हैं। पुलिस के पास न तो अपना साइबर थाना है और न ही साइबर लैब। इंटरनेशनल, नेशनल और अब शहर में लगातार बढ़ रहे साइबर क्राइम को देखते हुए यूटी पुलिस ने भी अब गृह मंत्रालय को साइबर थाना बनाने के लिए प्रपोजल भेजा है। इसके अलावा साइबर अपराधियों को पकड़ पाने और उनके खिलाफ सबूत जुटाने के लिए आधुनिक लैब के साथ ही कई उपकरण मुहैया कराने की मंजूरी मांगी गई है। फिलहाल प्रपोजल की फाइल गृह मंत्रालय के पास है।
रोज 8 से 10 शिकायतें
चंडीगढ़ जैसे शहर में ही रोजाना 8-10 शिकायतें साइबर क्राइम से जुड़ी हुई आ रही हैं। ऐसे में साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस विभाग ने साइबर सेल तो बना दिया, लेकिन अपराधियों को पकड़ने के लिए न तो आधुनिक संसाधन हैं और न ही उपयुक्त स्टाफ। ऐसे में शिकायतों का आंकड़ा बढ़ने के साथ ही कई केस ऐसे हैं, जिनकी जांच तक कई-कई हफ्ते तक शुरू नहीं हो पाती है। डीएसपी साइबर के अनुसार साइबर सेल में स्टाफ की कमी को देखते हुए विभाग की ओर से यहां साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। इसके अलावा यहां आधुनिक उपकरणों से युक्त लैब के लिए भी मंजूरी मांगी गई है। थाना बनने के साथ ही यहां ट्रैंड स्टाफ तैनात किया जाएगा।
साल दर साल बढ़ रहीं शिकायतें
वर्तमान में सेल में इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर समेत 45 के करीब का स्टाफ है। हर जांच अधिकारी के पास औसतन 100 से अधिक केस हैं। वहीं आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2014 में साइबर सेल में 1169 शिकायतें आईं। 2015 में 1448 तो वर्ष 2016 में 1544 शिकायतें आईं। इस वर्ष अब तक करीब 800 शिकायतें आ चुकी हैं। सेल के अधिकारी भी खुद दबी जुबां इस बात को मानते हैं कि स्टाफ की कमी के कारण काफी काम प्रभावित हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी नई शिकायतों की जांच को लेकर सामने आ रही है।
लैब बनने से सबूत जुटाने में मिलेगी मदद
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस के पास सबसे बड़ी समस्या सबूत जुटाने में आती है। साइबर लैब बनने से इस समस्या को हल करने में काफी हद तक मदद मिलेगी। लैब में फॉरेंसिक इमेजिंग, सेलेब्राइट जैसे उपकरण आने के बाद केस में सबूतों की प्रमाणिकता बढ़ेगी। साइबर से जुड़े अधिकतर केसों में आरोपी अदालत में कमजोर सबूतों के चलते बरी हो जाते हैं, लेकिन उक्त लैब बनने से सबूत पुख्ता और प्रमाणित होने से अदालत में पुलिस का केस मजबूत बन सकेगा। इससे अपराधी भी बच नहीं पाएंगे।
विभाग ने यूटी में साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा हुआ है। थाने और लैब पर करीब 40 लाख रुपये का खर्च आएगा। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद यूटी में साइबर का अपना थाना होगा। थाना बनने के बाद स्टाफ की कमी दूर की जाएगी। साथ ही आधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इससे केस की जांच में मदद मिलेगी।
- ईश सिंगल, एसएसपी
- एमएचए से चंडीगढ़ में ही लैब बनाने के लिए भी मांगी अनुमति
- स्टाफ कम होने से भी केसों की जांच पर पड़ रहा असर
- औसतन रोजाना आती हैं 8-10 शिकायतें
- जांच अधिकारियों के पास पहले से हैं कई केस की जांच
- लगातार बढ़ रहा है पेंडिंग शिकायतों की संख्या