स्वार्थ के लिए अपनों की बलि की गाथा है रक्तबीज
-टैगोर थियेटर में मंचित नाटक में मानव के अंदर छिपे स्वार्थरूपी राक्षस को किया गया उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विजय कपूर द्वारा निर्देशित शंकर शेष का प्रसिद्ध नाटक रक्तबीज का मंचन सोमवार को टैगोर थियेटर में किया गया। इस नाटक को हरियाणा कला परिषद और सांस्कृतिक कार्य विभाग चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित किया गया।
वास्तव में यह नाटक मानव के अंदर के राक्षसों से निपटता है। खासतौर से इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से कीमतों को चुकाने, अपने जीवन साथी के सपनों को रौंदने के लिए इंसान किस हद तक जा सकता सकता है। साथ ही दिखाया गया कि किस प्रकार से दानव रक्तबीज के रक्त की बूंदों की तरह जहर फैलता ही जाता है। इस नाटक की कथावस्तु हत्या और आत्महत्या पर आधारित है। इसमें दो जोड़े हैं जो एक दूसरे का उपयोग करने के खेल में उतर जाते हैं। निर्देशक विजय कपूर ने दो उदाहरण के साथ स्थितियों का प्रदर्शन करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें दिखाया जाता है कि क्लर्क शर्मा हैं और उनकी पत्नी सुजाता हैं। शर्मा अपने जीवन के वास्तविक सुखों का आनंद लेने के लिए साकार करके इसे बड़ा बनाना चाहते हैं। अच्छे काम के बावजूद शर्मा को नौकरी में तरक्की नहीं मिलती तो वो एक दिन वह अपने एमडी को ड्रिंक एंड डिनर पार्टी के लिए आमंत्रित करते है। सुजाता इस पर आपत्ति जताती है पर वह अपनी खूबसूरत पत्नी का इस्तेमाल एमडी, माथुर को फंसाने के लिए करता है। दूसरा उदाहरण एक मेहनती वैज्ञानिक डॉ. शांतनु का है। वह अपने निर्देशक गोयल का उपयोग करके अपने अनुसंधान को दुनियाभर में पहचान दिलवाना चाहता है। डॉ. गोयल, डॉ. शान्तनु का रिसर्च अपने नाम से प्रकाशित करते हैं और अंतत: आत्महत्या कर लेते हैं ताकि सच्चाई कभी सामने न आए। वो दोहरी महिमा प्राप्त कर शांतनु को दुखी और असहाय बना देते हैं। नाटक के प्रमुख कलाकार, गौरव आहूजा, बबीता कपूर, संजय मल्होत्रा, शुभम वशिष्ठ, प्रणव वशिष्ठ और गौतम प्रकाश हैं।