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8 साल में शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी नहीं आए गवाही देने

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पीयू में एसआई पर हमला करने के 13 आरोपी बरी
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आठ साल में 43 मौके, बयान दर्ज कराने नहीं आया शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
आठ साल और 48 बार गवाही का मौके देने के बावजूद शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी के बयान देने न आने पर अदालत ने 2010 में पंजाब यूनिवर्सिटी में हुए दंगा, हमला, सरकारी कर्मी पर हमला और गंभीर परिस्थितियों के साथ धमकी देने के मामले में 13 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
बरी होने वालों में अर्शबीर, रविंदर सिंह, मनदीप सिंह, भवजीत सिंह, रेशम, सिमरनदीप सिंह, गुरजीत सिंह, मनीष कुमार, विक्रमजीत सिंह, उदय सिंह, सिमरजीत सिंह ढिल्लों, गुरबीर सिंह ढिल्लों और रंजोध सिंह शामिल हैं। वहीं, सुखजीत सिंह बराड़, गुरिंदर वीर सिंह औलख और जगप्रीत सिंह को अदालत पहले ही भगौड़ा (पीओ) करार दे चुकी है। ये सभी उस समय पीयू के स्टूडेंट थे। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 506 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था।
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8 नवंबर 2010 को दर्ज मामले में शिकायतकर्ता तत्कालीन सब इंस्पेक्टर परगट सिंह थे। वहीं, एसआई तिलकराज इसके जांच अधिकारी थे। परगट सिंह की शिकायत के अनुसार, पंजाब यूनिवर्सिटी में दो स्टूडेंट पार्टी के समर्थकों में लड़ाई-झगड़ा हो गया था। इसके बाद वहां डंडे, तलवारें, हथियार आदि का खुलेआम इस्तेमाल हुआ। पुलिस ने एक छात्र नेता को हथियारों के साथ मौके से ही दबोच लिया था।
झगड़ा पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पुसू) के दो गुटों के पार्टी अध्यक्ष के पद पर लड़ने को लेकर शुरू हुआ था। इस दौरान सुखजीत सिंह बराड़ के खुद को प्रधान पद के लिए पुसू से घोषित करने के पोस्टर स्टूडेंट सेंटर पर लगा दिए थे। इसका दूसरे गुट के स्टूडेंट्स ने विरोध किया तो दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। इसके बाद मारपीट गंभीर होती चली गई और दोनों गुटों में तलवारें, हथियार आदि से हमला होने लगा।
वहीं पुलिस के अनुसार, जब वह मौके पर पहुंचे तो दोनों पक्ष एक दूसरे पर कोल्ड ड्रिंक की बोतलों से हमला कर रहे थे। एसआई परगट सिंह ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया तो इस दौरान उन्हें ही चोट लग गई। वहीं, दोनों गुटों में एक-डेढ़ महीने पहले से प्रधान पद पर खड़े होने को लेकर रंजिश चली आ रही थी। एसआई के जख्मी होने के बाद सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मामले में 16 स्टूडेंट्स के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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वहीं, बचाव पक्ष के वकील एसपीएस भुल्लर के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोप को साबित नहीं कर सका। केस में शिकायतकर्ता एसआई और जांच अधिकारी कभी बयान दर्ज कराने ही नहीं आए। इसके अलावा जो अन्य गवाह हुए भी उनके बयानों में क्रास एग्जामिनेशन के दौरान काफी अंतर सामने आए थे। वहीं, एक कांस्टेबल ने अपने बयान में यह तक कहा था कि उसे याद नहीं है कि घटना के दौरान किसे चोट आई थी।
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