प्रस्तावों पर नहीं गौर, सड़कों पर टूट रही जिंदगी की डोर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़
पैदल चलना सेहत के लिए तो लाभदायक है, मगर शहर की सड़कें पैदल चलने वालों के लिए महफूज नहीं हैं। आए दिन होने वाले सड़क हादसों के आंकड़े इसका सबूत हैं। पुलिस ने सड़क हादसों को रोकने के लिए कई प्रस्ताव बनाकर प्रशासन को भेजे, मगर इन सुझावों पर गौर ही नहीं फरमाया गया। पुलिस के अनुसार इस साल अब तक 175 रोड एक्सीडेंट हो चुके हैं। इनमें पैदल जा रहे 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 13 पुरुष और 4 महिलाएं थीं। अधिकांश हादसों में लोगों की जान तब गई जब वह सड़क पार कर रहे थे।
कहीं जेब्रा क्रॉसिंग नहीं, कहीं फुटपाथ नहीं तो कहीं रेलिंग नहीं
ट्रैफिक पुलिस के एक विशेष सेल ने हादसों की जांच की तो पाया कि इन जानलेवा हादसों का कारण शहर की सड़कों पर इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियां हैं। कुछ जगह फुटपाथ नहीं हैं, कुछ जगह जेब्रा क्रॉसिंग नहीं है, तो कुछ जगह पैदल पथ पर रेलिंग नहीं है। इस पर सेल ने इन कमियों को दूर करने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर प्रशासन के संबंधित विभाग को भेजे, मगर इन पर कोई काम नहीं किया गया। नतीजतन उन्हीं जगहों पर लोग हादसों का शिकार बन रहे हैं।
यहां के लिए भी भेजे सुझाव
ट्रैफिक पुलिस के एक्सीडेंट सेल के अनुसार सेक्टर-43 बस स्टैंड और हल्लोमाजरा की मुख्य सड़क पर पैदल पार पथ जेब्रा क्रॉसिंग या ओवरब्रिज बनाने के लिए लिखा गया था। इसके अलावा कॉलोनी नंबर-4 की भी मेन रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए यहां सड़क किनारे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाने के लिए लिखा गया है। वहीं शहर के सभी मुख्य मार्गों की विभाजित सड़कों के बीच जहां रेलिंग नहीं है, वहां भी रेलिंग लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इन जगहों पर भी राहगीर हादसों के शिकार होते हैं।
पैलिकन लाइट्स बनीं मददगार
सड़क पार करने वाले पैदल लोगों की सुरक्षा को देखते हुए शहर के सबसे अधिक भीड़-भाड़ वाली जगहों जैसे सुखना लेक रोड, सेक्टर-17 में नीलम सिनेमा के साथ लगती मुख्य सड़क, सेक्टर-16 अस्पताल की मेन रोड और ऐसी कुछ अन्य जगहों पर ट्रैफिक पुलिस ने पैलिकन लाइट्स लगाई हैं। इन लाइटों के जरिए सड़क पैदल पार करने वाले लोग सड़क क्रास करने से पहले यहां लगे बटन को दबाते हैं। इससे वाहनों के लिए लाइट रेड हो जाती है और पैदल लोग सड़क पार कर सकते हैं। एक बार बटन दबाने पर केवल 10 से 15 सेकंड के लिए लाइट रेड होती है। बाद में यह खुद ही ग्रीन हो जाएगी। इन लाइटों से यहां हादसों पर कुछ हद तक नियंत्रण हुआ है।
पिछले साल हुई थी 38 लोगों की मौत
पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार पैदल पार करते हुए 38 लोगों की हादसों में मौत हुई थी। वहीं करीब 65 लोग गंभीर घायल हुए थे।
-पैदल चलने वालों के लिए महफूज नहीं शहर की सड़कें, प्रशासन ने पुलिस के सुझावों को किया नजरअंदाज
- 17 पैदल चलने वालों की सड़क हादसों में 6 माह में जा चुकी है जान
-175 हादसे इस साल में अब तक हो चुके