आपसी कलह के कारण नहीं जीत पाए राजनीतिक छात्र संगठन
छात्र संगठनाें की वोटें छोटे दलों पर पड़ी, गुटबाजी से हुआ नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में इस बार राजनीतिक पार्टियों से संबंधित छात्र संगठनों को अपने नेताओं की कलह का फायदा पीयू के नए छात्र संगठनों को मिला है। छात्र संघ चुनाव में कई राजनीतिक पार्टियों में वोटों का ग्राफ तो बढ़ गया है लेकिन विवाद के कारण इस बार वह जीत नहीं दर्ज कर पाए हैं। इस बार पीयू के बिना राजनीतिक छात्र संगठनों को इसका फायदा अधिक मिला है। इस बार राजनीतिक पार्टियाें से संबंधित छात्र संगठनों के नेताओं की कलह कई बार सामने आई। इस कारण वोटर भी अलग अलग चले गए।
पीयू में इस बार सोई और एबीवीपी के वोट बढ़े हैं। इन दोनों पार्टियों के प्रेसिडेंट के वोट में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन जीत दोनों को नहीं मिली है। वहीं एनएसयूआई जहां पिछले साल विजेता थी। वहीं इस बार पार्टी पर गुटबाजी हावी हो गई। उसके प्रेसिडेंट पद के उम्मीदवारों की संख्या अधिक थी। इसमें एक उम्मीदवार का नामांकन कैंसल कर दिया गया। इस मनमुटाव के कारण नामांकन कैंसल हो गया। चुनाव में नामांकन के दौरान गुरजोत, लुबाणा और सचिन के बीच विवाद साफ तौर पर सामने आया। इसके बाद सचिन को प्रेसिडेंट का कैंडीडेट नहीं बनाया गया। इसके बाद वह हाईकोर्ट गए लेकिन वह केस हार गए। इस कारण सचिन ग्रुप की वोट इस बार एनएसयूआई को नहीं पड़ी। इस कारण उनके वोट कम हो गए। वहीं सोई पार्टी में भी ग्रुप बाजी सामने आई। इस कारण गंठबंधन वाले दल तो उनके जीत गए, लेकिन सोई अपनी सीट पर काबिज नहीं रह पाई। सोई से गठबंधन कर आईएसए से वाइस प्रेसिडेंट के पद दलेर सिंह ने जीत दर्ज की। वहीं सेक्रेटरी के पद पर इनसो की पार्टी से अमरिंदर सिंह ने जीत दर्ज की। वहीं एनएसयूआई से केवल संयुक्त सचिव के पद पर विपुल अत्रेय ने जीत दर्ज की। वहीं अपने दम पर लड़ने वाली एसएफएस पार्टी को प्रेसिडेंट पद पर जीत मिली है।