आईओ ने जांच को भेजे ही नहीं वायस सैंपल, आरोपी बरी
सबहेड
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 के मैचों में सट्टा लगवाने के आरोप में साइबर सेल ने किया था गिरफ्तार
फोन पर हुई बातचीत का रिकार्ड होने के बाद कोर्ट की मंजूरी पर लिए गए थे वायस सैंपल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वर्ल्ड कप क्रिकेट मैचों के दौरान सट्टा लगवाने के मामले में गिरफ्तार गांव दड़वा निवासी नरेश कुमार को सीजेएम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। ट्रायल के दौरान रोचक तथ्य यह सामने आया कि मामले के जांच अधिकारी ने आरोपी के अदालत की मंजूरी से वॉयस सैंपल लिए थे लेकिन कभी अदालत में उसकी सीएफएसएल रिपोर्ट पेश नहीं की क्योंकि उसके सैंपल कभी सीएफएसएल भेजे ही नहीं गए। आरोपी पर मोबाइल के जरिए लोगों से मैच पर सट्टा लगवाने का आरोप था, ऐसे में केस में उसकी मोबाइल पर हुई बातचीत जो पुलिस ने रिकार्ड की थी उसकी रिपोर्ट अहम सबूत साबित हो सकती थी।
इसके अलावा पुलिस आरोपी के खिलाफ वर्ल्ड कप मैचों में सट्टा लगवाने या अन्य कोई अहम सबूत भी अदालत में पेश नहीं कर सकी थी। मामले में आरोपी की गिरफ्तारी साइबर सेल के इंस्पेक्टर जसपाल सिंह ने की थी, लेकिन चार्जशीट इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों की ओर से दायर की गई थी।
बता दें कि 11 मार्च 2015 को साइबर सेल की शिकायत पर सेक्टर-17 थाने में आरोपी नरेश कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा-420, 506 के तहत केस दर्ज किया था। दर्ज मामले के अनुसार साइबर सेल को सूचना मिली थी कि गांव दड़वा निवासी नरेश कुमार वर्ल्ड कप मैचों के दौरान सट्टा लगवाने का काम करता है।
कार में बैठे-बैठे लगवाता था सट्टा
साइबर सेल ने आरोपी नरेश के नंबर को सर्विलांस पर लगाया तो पता चला कि उसके पास एक खास नंबर है जो केवल क्रिकेट मैच के दौरान ही ऑन होता है। भारत-आयरलैंड मैच के दौरान उसके मोबाइल की लोकेशन दड़वा की मिली थी। पुलिस टीम वहां पहुंची तो पता चला अब उसकी लोकेशन रामदरबार आ रही है। इसके बाद उसकी लोकेशन इंडस्ट्रियल एरिया मिली थी। पुलिस टीम वहां पहुंची, लेकिन वहां भी नरेश पकड़ा नहीं जा सका था। साइबर सेल की टीम उसके पीछे-पीछे जहां जाती उसकी लोकेशन बदलती रहती थी। आखिरकार पुलिस टीम ने उसे सेक्टर-17 के फायर ब्रिगेड आफिस के पास से गिरफ्तार कर लिया था। नरेश पर कार से बैठे-बैठे ही मोबाइल पर सट्टा लगवाने का आरोप था। पुलिस को उसके पास से चार मोबाइल बरामद हुए थे।