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15 लाख खेत मजदूरों को भूली सरकार

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15 लाख खेत मजदूरों को भूली सरकार
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खेत मजदूरों के कर्ज को लेकर अब तक नहीं हुआ कोई एलान
पिछले समय में तीन हजार मजदूर कर चुके हैं आत्महत्या
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
सरकार ने किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने का एलान तो कर दिया है, लेकिन खेत मजदूरों के सिर चढ़े कर्ज के बारे में कोई घोषणा नहीं की। जबकि, कांग्रेस ने अपने चुनाव मैनिफेस्टो में इसका वादा किया था।
पंजाब में जहां 20 लाख किसान हैं, वही 15 लाख खेत मजदूर भी हैं, जिनकी स्थिति दयनीय है। वर्ष 2000 से 2010 के दौरान जहां पंजाब में चार हजार किसानों ने आत्महत्या की थी। वहीं, तीन हजार खेत मजदूरों ने भी आत्महत्या की थी।
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पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के खेती अर्थशास्त्री डॉ. सुखपाल सिंह कहते हैं कि खेत मजदूरों के पास न तो जमीन है और न ही काम। न तो इन्हें खेतों में पूरे साल काम मिल पाता है और न ही इतने उद्योग हैं कि इन्हें शहरों में काम मिल सके। इनके पास कोई विकल्प ही नहीं बचा है। बैंक आमतौर पर इन्हें कर्ज नहीं देते क्योंकि इनके पास सिक्योरिटी के लिए कुछ नहीं है। आढ़ती भी इन्हें कर्ज देने में गुरेज करते हैं। खेत मजदूर या तो जमींदारों से या साहूकारों से कर्ज लेते हैं। सरकार को चाहिए कि इनका कर्ज एकमुश्त माफ कर दे। कर्ज बैंक चुका दें और सरकार बाद में धीरे-धीरे सरकार बैंकों को पैसा देती रही। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकार इनके लिए आय के ऐसे साधन विकसित करे जो गांवों में संभव हों। जिसमें एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग बेहतर विकल्प है। सरकार को लेबर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए।
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