गुड़ न्यूज: दो मिनट में पता चलेगा पकौड़े खाने लायक है या नहीं
एफएसएसएआई ने चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग को सौंपा टेस्टो-270 उपकरण, तेल की गुणवत्ता बताएगा
पूरे शहर के फूड आउटलेट को किया जाएगा चेक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बेशक आप करारे पकौड़े खाने के शौकीन हो, लेकिन जिस तेल में पकौड़े बन रहे हैं और सेफ है या नहीं इसके बारे में अब आपको तुरंत पता चल जाएगा। जी हां, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग टेस्टो- 270 नामक एक उपकरण सौंपा है, जो एक से दो मिनट के भीतर तेल की गुणवत्ता के बारे में बता देगा। एसएसएसएआई ने तेल के दोबारा इस्तेमाल किए जाने के कुछ मानक तय कर रखे हैं। उसके मुताबिक तेल में टोटल पोलर कम्पाउंड्स (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बार-बार उबालने से तेल की गुणवत्ता कम होती है और टीपीसी का निर्माण करते हैं। 25 प्रतिशत से ज्यादा टीपीसी कैंसर व हार्ट की बीमारी का खतरा बढ़ाता है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मशीन आ चुकी है। जल्द ही पूरे शहर में एक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत फूड आइटम बनाने वाली हर दुकान की जांच की जाएगी। टेस्टो-270 में एक नली बनी है, जिसे उबलते तेल में डाला जाएगा और दो मिनट के भीतर टोटल पोलर कम्पाउंड्स की मात्रा बता देगा। यदि किसी दुकानदार की टीपीसी की मात्रा तय मानक से ज्यादा आई तो पहले दुकानदार को इस बारे में समझाया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो तेल को उसी वक्त नष्ट कर दिया जाएगा। यदि दुकानदार फिर भी नहीं माने तो उनके खिलाफ कानूनी की कार्रवाई की जाएगी। चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डॉ जी दीवान ने बताया कि एक ही तेल के बार-बार उपयोग से खाद्य तेल में काफी चेजेंस आते हैं। इससे तेल रेडिकल्स फ्री बनता है। इन रेडिकल्स के निकलने से तेल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा खत्म हो जाती है, जो शरीर में बेड कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ाता है और इसके सेवन से एसिडिटी, दिल की बीमारी और कैंसर बढ़ने की संभावना रहती है। चंडीगढ़ को मशीन एक पायल प्रोजेक्ट के तहत सौंपी गई है। चंडीगढ़ के अलावा राजस्थान, गोवा, महाराष्ट्र में इस मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। आमतौर पर तेल के सैंपल भरे जाते हैं, मगर उसकी रिपोर्ट आने में कम से कम 14 दिन का वक्त लगता है। मगर इसमें दो मिनट के भीतर रिजल्ट आ जाते हैं।