अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
मार्च 2014 में हरियाणा के हिसार के गांव भगाना में चार नाबालिग दलित लड़कियों के साथ हुए गैंगरेप के बाद दलित जाति के अन्य परिवारों द्वारा गांव छोड़ने के मामले में प्रभावित 238 परिवारों में से 98 के पुनर्वास के लिए पेशकश की गई, लेकिन वे वापस आने को तैयार नहीं हैं। यह जानकारी हरियाणा सरकार की ओर से पीआईएल बेंच को दी गई। प्रभावित लोगों के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में उदासीन रवैया अपना रही है। कोर्ट ने कई साल पहले डीसी को मौके पर जाकर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन डीसी आज तक मौके पर नहीं गए। हाईकोर्ट की पीआईएल बेंच ने डीसी को आदेश दिया कि प्रभावित गांव में जाकर अगली सुनवाई पर वहां की स्थिति के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करे।
इस मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को गैंगरेप पीड़ितों और गांव छोड़ गए इस विशेष जाति के परिवारों के पुनर्वास के आदेश दिए थे। आंबेडकर वेलफेयर समिति के वकील आरएस बैंस ने हाईकोर्ट को बताया था कि 2014 में हुई घटना के बाद अब भी कई परिवार प्रभुत्वशाली जाति के डर के मारे गांव वापस नहीं आए हैं। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है और सरकार है कि इस मामले में कुछ भी नहीं कर रही है। इससे पहले हरियाणा सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दी थी कि इस गांव के जो परिवार गांव छोड़ गए थे, उनमें से कुछ परिवारों को छोड़ अन्य सभी परिवार वापस गांव आ गए हैं। वहीं दबंगों द्वारा इस गांव के दलितों को उनके क्षेत्र में आने से रोकने के लिए जो दीवार खड़ी की गई थी, उस दीवार को भी सरकार ने गिरा दिया गया है। गत वर्ष गैंग रेप की घटना के बाद कई परिवार गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गयी थी। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि इन परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा अन्य आदेश जारी नहीं किए जा सकते और मामले में सरकार को इन परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। बाद में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई थ्री।
अब तक दहशत में 98 परिवार, गांव लौटने को नहीं तैयार
भगाना गांव में दलित लड़कियों से रेप के बाद परिवारों के पलायन का मामला
हाईकोर्ट ने हिसार के डीसी से तलब की मामले की रिपोर्ट