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सीएलपी की मीटिंग में रेत खदानों पर बात ही नहीं हुई

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सीएलपी की मीटिंग में रेत खदानों पर नहीं हुई चर्चा
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पुराने दिग्गजों से लेकर पहली बार सदन में पहुंचे विधायक भी हुए हैरान
अंदरखाते बनाई गई बजट सत्र के लिए काउंटर स्ट्रेटजी
ज्यादा राजस्व और पारदर्शी नीलामी से किया जाएगा विपक्ष का मुंह बंद
विधायकों का रोष, बादलों के खास अफसर अब भी महत्वपूर्ण पदों पर
नए विधायकों को दी जानकारी, पुरानों को सौंपी जिम्मेदारी
अजायब सिंह भट्टी होंगे विधानसभा के डिप्टी स्पीकर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
विधानसभा के बजट सत्र से एक दिन पहले हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में रेत खदानों का मुद्दा उठा ही नहीं। जिस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, उस पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से लेकर किसी और नेता ने भी कुछ नहीं बोला। जिसे लेकर पुराने दिग्गजों से लेकर पहली बार विधायक बने नेता भी हैरान थे। क्योंकि उन्हें लग रहा था कि सरकार इस मुद्दे को लेकर बैकफुट पर है। बैठक में अजायब सिंह भट्टी को विधानसभा का डिप्टी स्पीकर नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा की गई।
सीएम की अगुआई और आशा कुमारी, हरीश चौधरी व सुनील जाखड़ की मौजूदगी में पंजाब भवन में हुई सीएलपी की मीटिंग बेहद कैजुअल और फॉर्मल रही। औपचारिक तौर पर ज्यादातर समय नए विधायकों को सदन के तौर-तरीके बताने में गया। साथ ही पुराने दिग्गजों की ड्यूटी लगाई गई कि बहस के दौरान कौन नशे, खेती संकट समेत किस-किस मुद्दे पर बोलेगा ताकि वे पहले से होमवर्क करके आएं। लेकिन अंदरखाते सीएम और उनके करीबी भी जानते हैं कि रेत खदानों के विवाद को लेकर राणा गुरजीत सिंह विपक्ष के निशाने पर रहेंगे।
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नए विधायकों का मानना था कि सरकार ने इससे निपटने को जो भी कदम उठाए हों, पर कांग्रेस बैकफुट पर है। इसलिए अंदरखाते इसके लिए काउंटर स्ट्रेटेजी तैयार कर ली गई है। विपक्ष के आरोपों पर एक ही जवाब दिया जाएगा कि पिछली सरकार में 500 खदानों की नीलामी 40 करोड़ में हुई थी। अब सिर्फ 100 खदानें एक हजार करोड़ में नीलाम हुई हैं। सरकार का राजस्व कई गुना बढ़ गया है। दूसरे, नीलामी पारदर्शी ढंग से हुई है। जो भी पैसा आया, बैंक से ट्रांसफर हुआ है, नंबर एक में है। अब बोली लगाने वाले के पास पैसा कहां से आया, इसकी जांच ईडी और आयकर विभाग कर सकते हैं। जिसने पैसा जमा कराया, वह कहां से लाया, उससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस को शिअद-भाजपा से ज्यादा खतरा नहीं महसूस हो रहा क्योंकि उनके दस सालों के कार्यकाल का चिट्ठा है, लेकिन आम आदमी पार्टी को जवाब देना मुश्किल पड़ सकता। सत्र में विपक्ष के हमलों के जवाब की जिम्मेदारी मुख्य तौर पर नवजोत सिद्धू और मनप्रीत बादल पर रहेगी, यूथ ब्रिगेड को जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक के दौरान कई विधायकों ने इस बात पर रोष जताया कि जो अफसर बादलों के करीबी थे, वे अब भी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं।
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