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दो प्राइवेट स्कूलों में बिल्डिंग वायलेशन और मिसयूज का लेकर चेकिंग

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दो प्राइवेट स्कूलों में बिल्डिंग वायलेशन और मिसयूज को लेकर चेकिंग
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खामियां पाए जाने पर एस्टेट आफिस ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
बिल्डिंग वायलेशन और मिसयूज को लेकर एस्टेट आफिस ने दो प्राइवेट स्कूलों में चेकिंग की। खामियां पाए जाने पर एस्टेट आफिस ने दोनों प्राइवेट स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा है।
डीसी के निर्देश पर शहर के 71 प्राइवेट स्कूलों में बिल्डिंग वॉयलेशन व मिसयूज को लेकर चेकिंग की जा रही है। एसडीओ बिल्डिंग व एरिया जेई ने हाल ही में सेक्टर-32 स्थित सेंट एनीस स्कूल और सेक्टर-46 गुरुनानक विद्या भंडार ट्रस्ट में चेकिंग की। अधिकारियों के अनुसार स्कूल में कई प्रकार के वायलेशन पाए गए, जिस पर एस्टेट आफिस ने कार्रवाई की है। इससे पहले एस्टेट आफिस की ओर से सेक्टर-37 स्टेपिंग स्टोंस स्कूल, शिवालिक स्कूल और सेक्टर-40 स्थित श्री गुरु हरिकृष्ण स्कूल में चेकिंग की थी। एस्टेट आफिस के अधिकारियों ने बताया चेकिंग में सभी स्कूलों में बिल्डिंग वायलेशन पाई गईं।
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बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि वॉयलेशन व मिसयूज को लेकर दोनों शिक्षण संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इन स्कूलों की रिपोर्ट तैयार कर डीसी को भेज दी गई है। इन पर मिसयूज और वायलेशन को लेकर कार्रवाई की जाएगी। प्राइवेट स्कूलों की लगातार बढ़ रही मनमानी पर अब एस्टेट आफिस अपने शिकंजा कस रहा है। इसके लिए 6 इंस्पेक्टर, 2 एसडीओ व 6 जेई को अपने- अपने एरिया में सर्वे करने के आदेश दिए हैं।
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शहर के अधिकतर स्कूलों में बिल्डिंग वॉयलेशन व मिसयूज
- स्कूलों के बेसमेंट में स्टोरेज की जगह चल रहे क्लासरूम व प्ले विंग
- कई स्कूलों में एडिशनल कंस्ट्रक्शन को लेकर नक्शा पास नहीं
- बिल्डिंग में किए गए एडिशनल चेंज, कैंटीन और पार्किंग की मंजूरी नहीं
- अधिकतर प्राइवेट स्कूल कोचिंग संस्थानों को क्लासरूम सबलेट कर रहे कमाई
- स्कूल के आगे पार्किंग के लिए अवैध कब्जा

125 ईडब्ल्यूएस सीटों पर मांगी रिपोर्ट
शहर के करीब 71 प्राइवेट स्कूलों में इस समय 125 ईडब्ल्यूएस सीटें खाली पड़ी हैं। डीसी ने सभी एसडीएम को निर्देश जारी कर अपने अपने एरिया के सभी प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कोटे के सीटों का विस्तृत ब्योरा तैयार कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है ताकि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उनका हक दिलाया जा सके।
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