माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। आईटीबीपी भानू में 604 महिला सिपाहियों में मुझे अपनी बेटी दिखाई दीं। अब यह मेरे लिए बहुत भावनात्मक पहल है। ट्रेनिंग के दौरान इनकी समस्या का हल निकालने के लिए अपनी पत्नी का नंबर नोटिस बोर्ड पर लगवाया। अगर कोई महिला जवान पुरुष होने के नाते मुझे अपनी समस्या नहीं बता पा रही है तो वह मेरी पत्नी को अपनी पर्सनल और घरेलू समस्या बता सके। इसका बहुत अच्छा रिस्पांस रहा। सभी समस्या का समाधान खोजने के साथ ट्रेनिंग कराई गई।
ये बात दीक्षांत समारोह से पहले शनिवार को आईटीबीपी भानू के महानिरीक्षक एपीएस निंबाडिया ने कही। उन्होंने कहा कि महिला सिपाहियों की हर समस्या का हल निकालने की कोशिश की गई। इसकी बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। ट्रेनिंग के दौरान सुझाव पेटी लगाई गई। इसमें महिला सिपाहियों के सुझाव को लेने के बाद लागू भी किया गया, जिससे वह आसानी से अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सकीं। वहीं, महिला कुक, महिला सफाईकर्मी भी उन्हें ट्रेनिंग के दौरान रहने वाले आवास में उपलब्ध कराई गईं। दोस्ताना माहौल में उन्हें ट्रेनिंग का मौका मिला। भारत तिब्बत सीमा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर भानू के आईजी एपीएस निंबाडिया ने बताया कि 28 सितंबर को 604 महिला सिपाही की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाएगा। सेंटर में सुबह 7 से 9 बजे तक परेड का आयोजन किया जाएगा।
वैपन चलाने, मैप रीडिंग और सेल्फ डिफेंस की दी गई ट्रेनिंग :
मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए आईजी ने बताया कि भर्ती चयन बोर्ड की तरफ से आईटीबीपी में 604 महिला जवानों का चयन किया था। इनमें देशभर के विभिन्न राज्यों से इन महिला सिपाहियों में महिलाएं शामिल हुईं, जिन्हें 42 सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती है, जो इन महिला जवानों की पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वैपन चलाने, मैप रीडिंग, सेल्फ डिफेंस, फाइनेंसियल मैनेजमेंट, करियर, कराटे, जूडो, कंप्यूटर सहित अन्य जरूरी जानकारी से अवगत कराया गया है। इस दौरान उन्हें बिल्डिंगों से उतरने, जंगल में रहने, विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभालने और निडर बनाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इन प्रशिक्षणार्थियों के साथ विभिन्न राज्यों की भाषा, वेशभूषा, कल्चर को सिखाने का प्रयास किया गया।