चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में 28 अप्रैल को होने वाली 68वीं कन्वोकेशन में इंफोसिस फाउंडेशन के ट्रस्टी को ऑनरेरी अवार्ड दिए जाने से खड़े हुए विवाद को हल करने के मकसद से रविवार को सीनेट की स्पेशल मीटिंग बुलाई गई है। स्पेशल मीटिंग में इंफोसिस फाउंडेशन की ट्रस्टी सुधा मूर्ति को डॉक्टर आफ लिटरेचर की उपाधि दिए जाने पर चर्चा की जाएगी। सभी सीनेट सदस्य फैसला लेंगे कि क्या सुधा मूर्ति को यह उपाधि दी जानी चाहिए या नहीं क्योंकि सुधा मूर्ति एनजीओ स्तर के कई पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं। पीयू की ओर से पहले साहित्य अकादमी अवार्ड हासिल करने वाले को ही यह उपाधि दी जाती थी।
सुधा मूर्ति को ऑनरेरी डिग्री दिए जाने को लेकर हाल ही में सीनेटर प्रो. चमन लाल भी पत्र लिखकर सभी सीनेटर, वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार से इस मामले में सवाल पूछे चुके हैं कि आखिर सुधा मूर्ति को किस आधार पर यह उपाधि दी जा रही है। कन्वोकेशन में इसरो के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के चेयरमैन डॉ. के सीवान को विज्ञान रत्न दिया जाएगा।
सीनेट बैठक को किया जा रहा पोस्टपोन
पत्र के जरिए प्रो. चमन लाल ने पीयू प्रशासन से बार-बार सीनेट बैठक के टालने को लेकर भी जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी में न तो मार्च में बैठक बुलाई गई और 29 अप्रैल को होने वाली बैठक भी कन्वोकेशन की वजह से पोस्टपोन कर दी गई है। 29 अप्रैल की मीटिंग को 21 अप्रैल को भी बुलाया जा सकता था, ताकि अहम मुद्दे इस बैठक में डिस्कस किए जा सकें। लेकिन प्रशासन ने इस विषय में गंभीरता न दिखाते हुए बैठक को ही स्थगित कर दिया, जो उचित फैसला नहीं है।
1949 में हुई ऑनरेरी डिग्री देने की शुरुआत
पंजाब यूनिवर्सिटी में ऑनरेरी डिग्री देने की शुरुआत 1949 में की गई थी। इसके तहत लॉ, साइंस व लिटरेचर में अब तक कुल 98 ऑनरेरी डिग्री दी गई है। पीयू ने सरदार वल्लभ भाई पटेल, जस्टिस मेहरचंद महाजन, नोबेल विजेता हरगोबिंद खुराना, अमर्त्य सेन, अमृता प्रीतम, वेंकटरमन रामाकृष्णन, एमएस स्वामीनाथन, मुल्क राज आनंद, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जस्टिस एम हरदुल्ला, प्रो. जगदीश एन भगवती, प्रो. सतीश धवन आदि के समाज के प्रति योगदान को देखते हुए ऑनरेरी डिग्री से सम्मानित किया है।
कन्वोकेशन में लंच के बाद पैरेंट्स को एंट्री
पंजाब यूनिवर्सिटी 28 अप्रैल को होने वाले 68वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों में जुटा है। डिग्री पाने वाले स्टूडेंट्स को न्योता भेजा जा चुका है, लेकिन इस बार पैरेंट्स को इजाजत लंच के बाद ही दी जाएगी। कई स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर अपना रोष जाहिर किया है। पीयू के रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह का कहना है कि इस बार डिग्री पाने वाले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है। हालांकि इसके बावजूद हर साल की तरह इस बार भी पैरेंट्स को इजाजत दी जाएगी, लेकिन लंच के बाद। प्रो. करमजीत सिंह के अनुसार नियमों में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं, लेकिन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कुछ बदलाव जरूर किए जाएंगे।