पीजीआई के दो प्रोजेक्ट के लिए काटने पड़ेंगे 133 पेड़
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77 पेड़ों के काटने की मिली चुकी है अनुमति, बाकी पेड़ों को भी काटने की स्वीकृति जल्द मिलेगी
पीजीआई इन पेड़ों के मुकाबले लगाने होंगे पांच गुना पौधे
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। पीजीआई के दो बड़े प्रोजेक्ट एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर और एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर के लिए कुल 133 पेड़ काटे जाने हैं। फारेस्ट डिपार्टमेंट ने इनमें से 77 पेड़ काटने की स्वीकृति भी दे दी है। बाकी पेड़ों की स्वीकृति भी जल्द मिलने वाली है। हालांकि इन्वायरमेंट डिपार्टमेंट ने इन पेड़ों के बदले पांच गुना पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं। पीजीआई के ये दोनों ड्रीम प्रोजेक्ट हैं। न्यूरोसाइंस सेंटर में 495.31 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, जबकि मदर एंड चाइल्ड सेंटर में 485 करोड़ रुपये। पीजीआई के अधिकारियों के मुताबिक करीब तीन हजार स्क्वायर मीटर में न्यूरोसाइंस सेंटर बनना है। इस पूरे एरिया में करीब 77 पेड़ लगे हैं। काटे जाने वाले पेड़ों के बदले पीजीआई की ओर से पौधरोपण शुरू कर दिया गया है लेकिन इन पौधों को बड़े होने में कम से कम 10-15 साल का वक्त लगेगा। साथ ही इन पौधों की मेंटेनेंस भी काफी करनी होगी। यदि लापरवाही हुई तो ये पौधे नहीं बढ़ पाएंगे।
पीएम मोदी रखेंगे शिलान्यास
पीजीआई के इन दोनों प्रोजेक्ट का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रखना है। इस बारे में प्रधानमंत्री दफ्तर की ओर से स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि अब तक इसकी तारीख सुनिश्चित नहीं हुई है। इस बीच प्रोजेक्ट की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। सभी संबंधित डिपार्टमेंट से क्लीयरेंस लेने पर काम चल रहा है। इस बारे में एचएससीसी और न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलाजी व न्यूरोसाइंस के बीच कई बैठकें भी हो चुकी हैं, ताकि किसी तरह की कोई असमंजस की स्थिति न रहे। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पीजीआई में ही बन रहे 250 बेड के हास्पिटल के बनने के दौरान 16 तरह की खामियां रह गई थीं, जिसे इस हास्पिटल के निर्माण में देरी भी हो गई है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये प्रोजेक्ट
मदर एंड चाइल्ड केयर करीब 300 बेड की यूनिट होगी। उत्तर भारत का यह पहला सेंटर होगा, जहां एक छत के नीचे नवजात और मदर के इलाज से जुड़ी सभी इमरजेंसी व एडवांस्ड सुविधाएं होंगी। इसमें प्रमुख रूप से नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट, रोबोटिक सर्जरी, ह्यूमन मिल्क बैंक, एडवांस्ड इफर्टिलिटी सर्विस होगी। इसी तरह से न्यूरोसाइंस सेंटर 300 बेड का होगा। इसमें न्यूरोलाजिक्ल व न्यूरोसाइंस से जुड़े डिस्आर्डर के सभी एडवांस्ड ट्रीटमेंट होगा।