चार घंटे इंतजार के बाद भी नहीं आए शक्ति और कालिया
वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव में नामांकन भरने पर फिर भाजपा में बवाल
सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद जैन करते रह गए इंतजार
शाम 4.30 बजे संगठन मंत्री और पार्टी प्रभारी की सहमति से बदले उम्मीदवार
फरमिला देवी और अनिल दूबे का नामांकन मौके पर ही भरवाया गया
गुटबाजी का फायदा उठाने बबला पहुंचे, लेकिन नामांकन नहीं भर पाए
टंडन गुट हीरा नेगी को नहीं, आशा को बनवाना चाहता था उम्मीदवार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
मेयर चुनाव के बाद भी भाजपा में गुटबाजी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। मंगलवार को चार घंटे तक सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और मेयर देवेश मोदगिल खुद टंडन गुट के पार्षदों का इंतजार करते रहे, लेकिन वित्त एवं अनुबंध कमेटी के चुनाव के लिए नामांकन भरने शाम पांच बजे तक राजेश कालिया और शक्तिदेव शाली नहीं आए।
सांसद व पूर्व सांसद ने संगठन मंत्री और पार्टी प्रभारी की सहमति से पूर्व मेयर राजबाला मलिक, हीरा नेगी, शक्तिदेव शाली और राजेश कालिया का नाम नामांकन भरने के लिए तय किया था। राजेश कालिया और शक्तिदेव शाली के नहीं आने पर पार्षद फरमिला देवी और अनिल दूबे का नामांकन भरवाया गया।
मेयर के कमरे से कई बार शक्तिदेव शाली और राजेश कालिया को फोन किया गया, जबाव मिला कि वह आ रहे हैं, पर आए नहीं। मेयर के कमरे में बैठकर सांसद खेर संगठन मंत्री दिनेश कुमार और पार्टी प्रभारी प्रभात झा के संपर्क में रहीं।
कांग्रेस की ओर से गुरबख्श रावत ने सोमवार को ही नामांकन भर दिया था। पांच ही नामांकन होने से सर्वसम्मति से अनुबंध कमेटी के सदस्य चुन लिए गए हैं। सांसद खेर और पूर्व सांसद जैन ने पूरे मामले की जानकारी हाईकमान को दे दी है। इससे पहले मेयर चुनाव में देवेश मोदगिल के उम्मीदवार बनाने पर आशा जसवाल ने 12 पार्षदों के साथ बगावत करके नामांकन भर दिया था। पार्टी ने काफी मुश्किल से मोदगिल के माफीनामा के बाद आशा जसवाल को शांत किया था। अभी वह गुटबाजी शांत नहीं हुई थी कि अनुबंध कमेटी के चुनाव ने पार्टी में और बवाल बढ़ा दिया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब सांसद इतने घंटे नगर निगम में रही हों।
टंडन गुट ने क्यों दिखाई नाराजगी
टंडन गुट की नाराजगी पर नेताओं का कहना था कि उम्मीदवारों को तय कराने में भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और पूर्व मेयरों की अनदेखी की गई। टंडन से नहीं पूछा गया, जबकि यह तय हुआ था कि अध्यक्ष और पूर्व मेयरों की सहमति से मेयर मोदगिल अहम निर्णय करेंगे। इसकेसाथ ही टंडन गुट चाहता था कि हीरा नेगी को फिर से उम्मीदवार नहीं बनना चाहिए क्योंकि नेगी पिछले साल भी अनुबंध कमेटी के चुनाव में उम्मीदवार बनी थीं। हालांकि, नेगी क्रॉस वोटिंग कर हार गई थी। टंडन गुट ने पूर्व मेयर आशा जसवाल का नाम उम्मीदवार के तौर पर दिया था, लेकिन खेर गुट इसके लिए तैयार नहीं हुआ, जबकि पूर्व मेयर अरुण सूद को भी उम्मीदवार बनाने की बात को भी खेर और जैन गुट सिरे से खारिज कर गया। टंडन गुट का कहना है कि मोदगिल के चुनाव जीतने के बाद ही खेर और जैन गुट की ओर से उन पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया गया, जो कि गलत था, जबकि सभी पार्षदों ने मोदगिल को वोट दी।
सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर रहे गायब
नामांकन के समय टंडन गुट के वही 12 पार्षद नहीं आए, जिन्होंने मोदगिल का विरोध जताते हुए आशा जसवाल को समर्थन दिया था, जबकि अनुबंध कमेटी के चुनाव के समय नामांकन के दौरान सीनियर डिप्टी मेयर गुरप्रीत सिंह और डिप्टी मेयर विनोद अग्रवाल भी मौजूद नहीं रहे। नामांकन के समय सांसद, पूर्व सांसद और खेर गुट के पार्षद मौजूद रहे। निर्दलीय और अकाली पार्षद हरदीप सिंह भी मौजूद रहे।
टंडन गुट के पार्षदों ने कम्युनिटी सेंटर में की बैठक
जिस समय सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और मेयर देवेश मोदगिल शक्तिदेव शाली और राजेश कालिया का इंतजार कर रहे थे, उस समय सेक्टर-22 के कम्युनिटी सेंटर में टंडन गुट के 12 पार्षद बैठक कर रहे थे। इस मौके पर पार्टी महासचिव प्रेम कौशिक और चंद्रशेखर भी मौजूद रहे। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन मुंबई में हैं। दोनों महासचिव फोन पर टंडन के संपर्क में थे।
बबला को देख दलीप का भरवाया नामांकन
टंडन गुट के शक्तिदेव शाली और राजेश कालिया के न आने की सूचना 4.20 बजे कांग्रेस के दवेंद्र सिंह बबला को मिली। ऐसे में बबला गुटबाजी का फायदा उठाने के लिए फटाफट नगर निगम में नामांकन भरने के लिए पहुंचे। उस समय बबला गोल्फ खेल रहे थे। बबला ने अतिरिक्त कमिश्नर एवं सचिव सौरभ मिश्रा से नामांकन के लिए फार्म भी ले लिया, लेकिन नामांकन में दो प्रपोजर के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। बबला ने मौके पर कांग्रेस पार्षद रविंदर कौर गुजराल को बुलाया और दूसरे प्रपोजर के लिए कांग्रेस पार्षद शीला फूल सिंह को बुलाने के लिए मैसेज दिया, तो पता लगा कि वह बीमार हैं। बबला ने एक नामांकन का आवेदन पत्र शीला फूल सिंह के बेटे मनोज सिहान को बुलाकर हस्ताक्षर करवाने के लिए भेजा, लेकिन मनोज सड़क पर लगे जाम के कारण हस्ताक्षर करवाकर समय पर नगर निगम नहीं पहुंच सके। 5 बजे तक सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन सचिव मिश्रा के कमरे में ही डटे रहे। 4.58 पर जब जैन को पता चला कि बबला नामांकन भर सकते हैं तो उन्होंने वहीं पर मौके पर मौजूद निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा के नामांकन फार्म पर हस्ताक्षर करवा लिए ताकि अगर बबला नामांकन भरते हैं तो वह शर्मा का भी नामांकन जमा करवा देंगे। ऐसी स्थिति में चुनाव होने की उम्मीद थी।
4.55 बजे तक इंतजार किया
4.40 बजे सांसद किरण खेर, मेयर व 8 पार्षदों केसाथ सचिव के कमरे में पहुंच गईं। सबसे पहले पूर्व मेयर राज बाला मलिक और हीरा नेगी का नामांकन भरवाया गया, उसके बाद 4.55 तक इंतजार किया गया। खेर और मेयर को उम्मीद थी कि शक्ति और कालिया आ जाएंगे, लेकिन न आने पर उन्होंने अनिल दूबे और फरमिला को नामांकन भरने के लिए कहा। अतिरिक्त कमिश्नर सौरभ मिश्रा की प्रशासन और कमिश्नर के साथ कई अहम बैठकें थीं, लेकिन समय पर नामांकन न होने से वह भी अपना कार्यालय न छोड़ पाए।
टंडन ने दी संगठन मंत्री को तीन पूर्व मेयर शामिल करने की सलाह
मंगलवार दोपहर भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की संगठन मंत्री दिनेश कुमार से फोन पर बात हुई। सूत्रों का कहना है कि टंडन ने संगठन मंत्री को यह सलाह दी कि पार्टी के जो तीन पूर्व मेयर हैं, उन्हें अनुबंध कमेटी का सदस्य बना दिया जाए, जबकि एक आरक्षित वर्ग के पार्षद का नामांकन भरवाया जाए। संगठन मंत्री ने यह प्रपोजल खेर और जैन के सामने रखा, लेकिन वे नहीं माने। जब संगठन मंत्री ने टंडन को कहा कि उनका प्रपोजल सांसद को पसंद नहीं है तो टंडन ने हीरा नेगी के बजाय सुनीता धवन को उम्मीदवार बनाने का प्रपोजल रखा, लेकिन वह भी संगठन मंत्री ने नहीं माना।
पहली बार बिना मनोनीत के अनुबंध कमेटी
22 साल के इतिहास में यह पहली बार होगा कि नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी में मनोनीत पार्षद नहीं होंगे। इससे पहले हर साल बनने वाली कमेटी में एक से दो सदस्य मनोनीत में से होते थे, लेकिन पिछले साल हाईकोर्ट ने मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार को खारिज कर दिया था, इसलिए इस बार भाजपा की ओर से किसी मनोनीत का नामांकन भी नहीं भरवाया गया।
सांसद और जैन पहली बार आए नामांकन भरवाने
पिछले तीन साल में जब से भाजपा का नगर निगम पर कब्जा हुआ है, तब से अब तक सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन कभी भी नामांकन भरवाने के लिए नगर निगम नहीं आए, लेकिन इस बार मोदगिल के मेयर बनने के बाद वह नामांकन भरवाने के लिए आए क्योंकि मोदगिल को खेर और जैन ने ही मेयर का उम्मीदवार बनवाया था।
कोट..
हाईकमान के निर्देश पर राजेश कालिया और शक्ति देव शाली को उम्मीदवार बनाया गया था। काफी इंतजार करने के बाद वह नहीं आए तो फरमिला देवी और अनिल दूबे का नामांकन भरवाया गया। अब वह क्यों नहीं आए, यह उनको ही पता होगा।
-सत्यपाल जैन, पूर्व सांसद
राजेश कालिया और शक्ति देव शाली का नामांकन भरने के लिए काफी इंतजार किया गया। हाईकमान को पूरे मामले की जानकारी है।
-किरण खेर, सांसद
प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन शहर से बाहर हैं। उम्मीदवारों को तय करने में उनकी राय नहीं ली गई। पार्षद शक्ति देव शाली व राजेश कालिया को मेयर ने नहीं बताया कि उन्हें अनुबंध कमेटी के चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है और नामांकन भरना है। उन्हें सिर्फ आने के लिए कहा गया था। अगर नामांकन भरने की बात बताई जाती तो वह इसे इमरजेंसी मानते हुए जरूर आते।
-प्रेम कौशिक, भाजपा महासचिव