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शहर में ठेके बंद करने के नोटिस पर हाईकोर्ट की रोक

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शराब के ठेके बंद करने की नोटिस पर रोक
हाईकोर्ट ने वाल्ट लिकर और जुबली बेवरेज की याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन को जारी किया नोटिस
नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मी. के दायरे में ठेका खोलने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है रोक
दूरी मापने के पैमाने पर चंडीगढ़ प्रशासन दुविधा में

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में ठेकों को बंद करने के यूटी प्रशासन के नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन को 4 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर दूरी तक कोई भी शराब का ठेका खोलने पर सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लग दी है। इसे लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है और यह नहीं तय हो पा रहा है कि 500 मीटर की दूरी को मापने के लिए कौन सा पैमाना इस्तेमाल किया जाए। प्रशासन के सामने एरियल डिस्टेंस या सड़क के जरिए गणना की जाए, इसे लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है।
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इस मामले में चंडीगढ़ के वॉल्ट लिकर प्राइवेट लिमिटेड और जुबली ब्रेवरेज सहित अन्य ने एडवोकेट जगमोहन बंसल के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासन के नोटिस को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत ही वर्ष 2017-18 की एक्साइज पालिसी बनाई है। इसी पॉलिसी के तहत पहले उन्हें ठेका दिया गया। पालिसी की शर्तों के तहत ही उन्होंने अप्रैल माह में करोड़ों की लाइसेंस फीस भी जमा करवा दी थी। एक याचिकाकर्ता ने बताया कि मध्य मार्ग नेशनल हाईवे है, ऐसे में यहाँ किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को सेक्टर-7 और 8 की इंटरनल मार्केट में ठेका अलॉट किया गया था। अगर सड़क के जरिए मध्य मार्ग से ठेकों की दूरी मापी जाए तो यह 500 मीटर से अधिक है। लेकिन अगर एरियल डिस्टेंस 464 मीटर है, इससे उसक ा ठेका 500 मीटर के दायरे में आ जाता है।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन ने पहले उनसे इन जगहों के लिए ठेकों का लाइसेंस जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने फीस भरकर काम भी शुरू कर दिया, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर प्रशासन ने 5 जून को उन्हें नोटिस थमा इन ठेकों को बंद करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रशासन अपने तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को परिभाषित कर रहा है। इन आदेशों में यह कहीं भी तय नहीं किया गया है कि, नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर की दूरी एरियल के जरिए तय की जाएगी या सड़क के जरिए तय की जाएगी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उन्हें पहले लाइसेंस जारी ही क्यों किया गया। अब उन्हें बंद किए जाने का नोटिस दिया जा रहा है। अगर अब वह अपना व्यवसाय बंद करते हैं तो उन्हें भरी नुकसान उठाना होगा। लिहाजा याचिकाकर्ताओं ने इस नोटिस पर रोक लगाए जाने की हाई कोर्ट से मांग की है। जस्टिस अमोल रतन सिंह एवं जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने इस नोटिस पर रोक लगाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
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