चुनौतियों को स्वीकारें, आज का शोध कल की दवा बन जाएगा : सुनील अरोड़ा
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने पीजीआईएमईआर के नए शैक्षिक सत्र का उद्घाटन किया
-पीजीआई निदेशक ने कहा- सहानुभूति के साथ पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआईएमईआर के नए शैक्षिक सत्र का शुभारंभ करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है कि चिकित्सा वास्तव में विज्ञान और कला है। उन्होंने कहा कि चिकित्सिक चुनौतियां आने पर मनोबल बनाए रखते हुए उस पर काम करें। वही काम आगे जाकर इनाम दिलाएगा। आज की दवा कल का शोध था, लेकिन आज का शोध कल की दवा बन जाएगा।
अरोड़ा ने बताया कि पुरानी बीमारियों के साथ पहले की तुलना में अधिक लोग अधिक समय तक जीवित रहेंगे। दूसरी ओर, जीवनशैली में बदलाव के कारण लोग समय से पहले उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एक डॉक्टर के अनुपात को 1000 व्यक्ति बताता है। लेकिन भारत में यह अनुमान है कि अनुपात 0.62 से 1000 व्यक्तियों तक है। उन्होंने भारत और दुनिया में दूरदर्शी नेताओं की भूमिका पर जोर दिया, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व के साथ अपने देशों के इतिहास को बदल दिया। उन्होंने इंडियन एयरलाइंस और स्किल इंडिया मंत्रालय में बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारे पास भारत में उत्कृष्टता के कई द्वीप हैं, जिन्हें बढ़ाया जाना चाहिए और व्यक्तियों को अपने संबंधित क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक टीम के काम के लिए एक साथ आना चाहिए। इस मौके पर पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रोफेसर जगत राम, डीन एकेडमिक्स प्रो. राजेश कुमार, डीन रिसर्च प्रो. अरविंद राजवंशी आदि रहे। संस्थान समारोह समिति अध्यक्ष प्रो. अजीत अवस्थी ने संचालन किया।
पीजीआई में उन्नत चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए स्वस्थ वातावरण
इससे पहले पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रोफेसर जगत राम ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और संस्थान की परंपराओं और उपलब्धियों के बारे में छात्रों के नए बैच का ज्ञानवर्धन किया। प्रो. जगत राम ने सभी से आग्रह किया कि पीजीआई को सर्वांगीण उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के सपने में अपने दिलों और आत्मा को लगाएं। यह संस्थान सहानुभूति के साथ बीमार और पीड़ितों के घावों पर मरहम का स्पर्श लागू कर सके। उन्होंने कहा कि पीजीआई में ऐसा बहुत कुछ है जिस पर हम गर्व कर सकते हैं। संस्थान उन्नत चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करता है। अब तक मेडिकल स्पेशिएलिटी में 5396, सर्जिकल स्पेशिएलिटी में 2673 छात्रों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्त्रस्मों में डिग्री प्राप्त की है। मेडिकल स्पेशियलिटी में 621 से अधिक व सर्जिकल स्पेशियलिटी में 236 छात्रों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।