नहीं आए 75 सीनेट मेंबर्स, वीसी की आखिरी सीनेट मीटिंग स्थगित
- सीनेट की बैठक में 91 में से 75 सदस्य गैरहाजिर, 16 की वोटिंग के बाद सीनेट स्थगित
- सीनेट की मीटिंग स्थगित होने के बाद किसी एजेंडे पर नहीं हुई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीयू के वीसी अरुण ग्रोवर की ओर से बोले गए सीनेट मेंबरों को अपशब्दों की वजह से उनकी आखिरी सीनेट मीटिंग में 75 सीनेट मेंबर हाजिर नहीं हुए, जिसके कारण इसे स्थगित कर दिया गया। सीनेट मीटिंग में मात्र 16 सदस्य उपस्थित थे। किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। बता दें कि पीयू के वाइस चांसलर अरुण ग्रोवर का कार्यकाल 22 जुलाई को खत्म हो रहा है।
वीसी के कार्यकाल खत्म होने से पहले सिंडीकेट और सीनेट के सदस्यों को उन्होंने गैंगेस्टर, माफिया और गिद्ध कहा था। इस कारण सिंडीकेट और सीनेट के मेंबर्स वीसी से नाराज हो गए थे और उन्होंने दोनों मीटिंग का बायकाट कर दिया। मीटिंग में सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी के नियम भी तय नहीं हो सके। इसके अलावा कई अहम मुद्दों पर सीनेट में मुहर नहीं लगी।
वीसी की ओर से कहे अपशब्द का गुस्सा सीनेट के सदस्यों में बना हुआ है। वीसी ने सीनेट के सदस्यों से सीनेट मीटिंग करने के लिए वोटिंग कराई। इसमें सात सदस्यों ने सीनेट मीटिंग नहीं होने पर वोटिंग की। इसके बाद वीसी ने मीटिंग स्थगित कर दी। इसमें दो सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
पीयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर अरुण ग्रोवर की ओर से मीटिंग के संचालन को लेकर कई तरह के तर्क दिए गए। इसके बाद भी उपस्थित सदस्यों ने मीटिंग संचालन से मना कर दिया। सीनेट मीटिंग में आए सात सदस्यों ने एक मत में कहा कि अगर मीटिंग संचालित होगी तो सभी मुद्दों पर निर्णय होगा।
नियमानुसार सीनेट मीटिंग संचालित करने के लिए कुल 91 सदस्यों में से 15 का उपस्थित होना अनिवार्य होता है। इसके बाद मीटिंग संचालित होती है। लेकिन मीटिंग संचालन के पक्ष में छह सदस्य थे। इसलिए किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी। सीनेट में 16 सदस्य आए हुए थे।
100 मुद्दों पर नहीं हुई बहस
सीनेट मीटिंग में 100 मुद्दों पर बहस होनी थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सेक्सुअल हरासमेट के आरोपी प्रोफेसर के भविष्य को लेकर निर्णय होना था। हालांकि किसी भी आइटम पर बहस नहीं हो सकी। इस कारण नए वीसी के सामने नियुक्ति के साथ कई चुनौतियां खड़ी होंगी, जिसमें शिक्षकों के प्रमोशन का मामला जुड़ा होगा।
दो दिन बाद वीसी को मीटिंग का दिया सुझाव
सीनेट की मीटिंग में उपस्थित कई सदस्यों ने संख्या कम होने के कारण वीसी को दो दिन के बाद मीटिंग री-कॉल कराने का सुझाव दिया, जिससे कि अनुपस्थित सदस्यों को आने का मौका मिल सके। अगर दोबारा से सीनेट री-कॉल मीटिंग में सदस्य नहीं आते हैं तो कई मुद्दों पर बहस कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि वीसी ने साफ कहा कि मेरे पास समय नहीं है। हाईकोर्ट में सुनवाई है, पर्सनल मीटिंग है, उसके बाद कार्यकाल की समय अवधि समाप्त हो जाएगी। चांसलर को सीनेट मीटिंग के बारे में जानकारी देनी होती है।
इन सदस्यों ने विपक्ष में डाले वोट
सीनेट की मीटिंग नहीं होने को लेकर सीनेट सदस्यों ने वोट डाले। इसमें प्रोफेसर रौनकी राम, अमीरा सुल्ताना, जरनैल सिंह, एचएस गोयल, डा. दिलीप, नरेंद्र संधू, नीरू मलिक ने मीटिंग नही ंहोने को लेकर वोटिंग की। वहीं सीनेट की मीटिंग के पक्ष में प्रोफेसर इमैनुअल नाहर, प्रोफेसर आबी जांबा, वीके सिब्बल, चमन लाल, मनोज कुमार शमा, आईएस चड्ढा ने मीटिंग होने के पक्ष में वोटिंग की। वहीं प्रोफेसर प्रेम राजपूत और रब्रिंद्र नाथ शर्मा ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।