दुराचार पीड़िता नहीं हुई पेश, आरोपी फूफा बरी
पीड़िता ने अस्पताल में दिया था बच्चे को जन्म, नवजात के डीएनए सैंपल आरोपी से हुए थे मैच
नाबालिग ने मजिस्ट्रेटी बयान में फूफा को बेकसूर बताते हुए किसी अन्य पर लगा दिए थे आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नाबालिग से दुराचार और उसके बाद बच्चे को जन्म देने के मामले में पीड़ित भतीजी के बयान से पलटने, अदालत में बयान दर्ज न करवाने के लिए आने और सबूतों के अभाव में जिला अदालत ने आरोपी फूफा सेक्टर-32 निवासी प्रकाश सिंह को बरी कर दिया। सेक्टर-34 थाना पुलिस ने 2016 में पीड़िता के बयान के आधार पर प्रकाश सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था।
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार, 22 जुलाई 2016 को सेक्टर-34 पुलिस थाने में जीएमसीएच-32 से कॉल कर जानकारी दी गई थी कि एक नाबालिग गर्भवती को गायनी वार्ड में दाखिल करवाया गया है। थाने से महिला जांच अधिकारी ने उसके बयान लिए। बयान के वक्त उसने अपनी उम्र 15 साल बताई थी। हालांकि, अस्पताल में उसने खुद को 19 साल का बताया था।
पीड़िता ने बयान दिया था कि वह यूपी की रहने वाली है और उसकी उम्र 15 साल है। वह पांच साल पहले बुआ के पास आई थी। नवंबर 2015 में सेक्टर-46 में एक डॉक्टर दंपत्ति के यहां काम करने के साथ वहीं पर रहने लगी। दिसंबर 2015 में वह बुआ से मिलने आई थी। यहां उसके फूफा ने दुराचार किया। कुछ महीने बाद पेट में दर्द होने पर सेक्टर-32 अस्पताल जाने पर पता चला कि वह गर्भवती है। उसने एक लड़के को जन्म दिया। पुलिस ने आरोपी फूफा के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने पीड़िता, नवजात शिशु और आरोपी के ब्लड सैंपल डीएनए जांच के लिए भेजे। वह रिपोर्ट में पॉजिटिव आए थे।
उधर, पीड़िता ने अदालत में दिए धारा 164 के बयान में उम्र 19 साल बताते हुए फूफा को बेकसूर बताते हुए एक अन्य व्यक्ति पर अपने बच्चे का पिता होने की बात कही थी। इसके बाद से पीड़िता कभी अदालत में पेश नहीं हुई और न ही पुलिस ने अदालत में पेश किया।
बचाव पक्ष के वकील आदित्य कुमार शर्मा के अनुसार, पुलिस ने केस में निष्पक्ष जांच नहीं की। पुलिस न तो पीड़िता की सही उम्र का कोई दस्तावेज पेश कर पाई और न नहीं केस में कोई इंडिपेंडेंट गवाह पेश किया। पुलिस ने केवल मेडिकल रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट की राय के आधार पर केस दर्ज किया।