मनीमाजरा डिस्पेंसरी पर किडनी निकालने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
1994 में मनीमाजरा की डिस्पेंसरी में डिलीवरी के बाद पेट में दर्द की शिकायत रहने और जांच में एक किडनी गायब होने के मामले में महिला ने डिस्पेंसरी पर किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने की अपील की है। याचिका पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन, एसएसपी व मनीमाजरा के एसएचओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए महिला ने कहा कि 23 साल पहले 1994 में मनीमाजरा की डिस्पेंसरी में उसकी डिलीवरी हुई थी। उसके बाद से ही उसके पेट में दर्द रहने लगा। वह दर्द से लगातार परेशान रही। इस दौरान उसने कई जगह इलाज करवाया। लेकिन इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ। 2015 में उसे डाक्टरों ने पेट का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। उसने पंचकूला के एक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि उसकी एक किडनी गायब है। इसके बाद महिला ने इस बारे में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
महिला ने एडवोकेट मन्नू के भंडारी के माध्यम से याचिका दायर कर बताया है कि उसका डिलीवरी से पहले और डिलीवरी के बाद कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। ऐसे में कहीं और किडनी निकालने की कोई संभावना नहीं बनती है। उसकी किडनी मनीमाजरा डिस्पेंसरी में ही निकाली गई होगी। उसकी किडनी निकालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। महिला ने इसके साथ ही लंबे समय तक दर्द सहने के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की अपील की है।
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर यूटी प्रशासन, एसएसपी व एसएचओ मनीमाजरा को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी पूछा है कि क्यों न इस मामले की पुलिस से जांच करवाई जाए।