चंडीगढ़। लगभग तीन लाख करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे पंजाब की नई सरकार के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार को कामकाज संभाले अभी एक पखवाड़ा ही बीता है कि प्रदेश सरकार की आमदनी बढ़ने की खबर आ गई है। सूबे में कोविड और तीन माह पहले घटाई गई पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बावजूद प्रदेश सरकार ने इस साल पहली बार आमदनी के बजट अनुमान का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सरकार द्वारा लगाए गए सभी तरह के करों से औसतन 30 फीसदी आमदनी बढ़ी है।
कराधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए. वेणुप्रसाद के अनुसार पंजाब को सबसे ज्यादा आमदनी जीएसटी कलेक्शन में हुई है। जीएसटी कलेक्शन तय अनुमानित लक्ष्य से 828 करोड़ रुपये ज्यादा हुई है। हालांकि वैट में 2021-22 के आखिरी माह में कलेक्शन कम रही है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले इसमें भी 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जीएसटी कलेक्शन में 20.21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने के बावजूद वैट में इजाफे का मुख्य कारण यह रहा कि साल में पहले नौ महीने तक इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों के दाम सूबे में बाकी राज्यों से ज्यादा रहे। पिछले साल मार्च में 1121 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, जो इस महीने 1345.75 करोड़ रुपये की हुई है। बजट में सरकार ने 6027 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था, लेकिन इस साल वैट से सरकार को 7533.98 करोड़ रुपये मिले हैं।
सरकार ने शराब की बिक्री से भी आमदनी का 7002 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था और इतनी राशि जुटा ली गई है। हालांकि पिछले साल यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका था। पिछले साल 6250 करोड़ के अनुमान पर 5795 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके। स्टांप ड्यूटी से इस साल 3000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जबकि बजट अनुमान 2890 करोड़ रुपये का था।