सीईटीपी फेल, बिना ट्रीटमेंट बह रहा केमिकल युक्त पानी एचएसआईआईडीसी पर कार्रवाई और जुर्माने की तैयारी
पंचकूला। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला जहरीला कचरा जीवनदायिनी नदियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। एक चौंकाने वाले मामले में खुलासा हुआ है कि बरवाला औद्योगिक क्षेत्र की करीब 250 औद्योगिक इकाइयों का केमिकल युक्त गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे एक छोटी नदी के जरिये टांगरी नदी में गिराया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है। बोर्ड ने अब हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) पर रोजाना 8 हजार रुपये जुर्माना लगाने की तैयारी कर ली है।
सीईटीपी फेल, नदियों में मिल रहा केमिकल
जांच में सामने आया है कि उद्योगों के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए लगाया गया कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है। नियमों के अनुसार, किसी भी फैक्टरी का पानी नदी में छोड़ने से पहले उसे पूरी तरह ट्रीट किया जाना अनिवार्य है ताकि जलीय जीवों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। लेकिन यहां सीईटीपी की खामियों के कारण बिना ट्रीटमेंट के पानी सीधे नदी में जा रहा है, जिससे जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं।
प्रदूषण बोर्ड सख्त, सैंपल लैब भेजे कोर्ट केस की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की टीम ने विभिन्न ड्रेन और डंपिंग पॉइंट से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह में रिपोर्ट आ जाएगी। रिपोर्ट में उल्लंघन की पुष्टि होने पर एचएसआईआईडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही बोर्ड मामले को अदालत में ले जाने और सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है।
एचएसआईआईडीसी पर लगेगा जुर्माना
प्रदूषण बोर्ड के अनुसार पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब तक सीईटीपी में सुधार कर पानी का उचित ट्रीटमेंट शुरू नहीं होता तब तक एचएसआईआईडीसी पर रोज 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
आम जनजीवन और पर्यावरण पर खतरा
बिना ट्रीटमेंट के बह रहा यह पानी न केवल जल प्रदूषण बढ़ा रहा है, बल्कि भूजल को भी प्रभावित कर रहा है। इससे आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि नदियों का पानी काला पड़ चुका है और दुर्गंध के कारण जीवन प्रभावित हो रहा है।
इन नियमों के तहत होगी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार यह कार्रवाई जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत की जा रही है। धारा 24 और 25 के अनुसार बिना ट्रीट किए औद्योगिक अपशिष्ट को जल स्रोत में छोड़ना प्रतिबंधित है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा निर्देशों के तहत, सीईटीपी के मानकों का उल्लंघन होने पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। बोर्ड अब एचएसआईआईडीसी और संबंधित फैक्ट्रियों के खिलाफ कोर्ट में केस दायर करने की तैयारी में है।
कोट
हमने सैंपल ले लिए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है। करीब 250 फैक्ट्रियों का बिना ट्रीटमेंट वाला पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। एचएसआईआईडीसी को नोटिस जारी किया जा रहा है और रिपोर्ट के बाद कोर्ट केस के जरिए जवाबदेही तय की जाएगी।
-सुधीर मोहन, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पंचकूला