चंडीगढ़ स्टेशन का नया भवन खुला, सुरक्षा के बड़े दावे कैमरों तक सीमित
दीपक शाही
पंचकूला। चंडीगढ़ के वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के नाम पर बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बिना फायर एनओसी के ही स्टेशन की नई इमारत यात्रियों के लिए खोल दी गई है।
एक तरफ छह प्लेटफार्मों पर 22 नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे चालू कर दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर आग जैसी आपात स्थिति से निपटने की बुनियादी कानूनी मंजूरी लंबित है। सवाल यह उठता है कि क्या केवल कैमरों की नजर में सुरक्षा पूरी हो जाती है।
बिल्डर की लापरवाही के चलते दमकल विभाग तक फायर एनओसी के आवेदन की फाइल आज तक नहीं पहुंच पाई। यह स्थिति तब है, जब पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने फायर एनओसी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं। उनके दखल के बाद दमकल विभाग के अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर चुके हैं, फिर भी स्टेशन भवन कानूनी रूप से सुरक्षित घोषित नहीं हो पाया है।
455 कैमरों की योजना, फिलहाल सिर्फ 22 चालू
रेलवे स्टेशन परिसर में कुल 455 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं, जिनमें फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस कैमरे भी शामिल हैं। फिलहाल सुरक्षा के तौर पर छह प्लेटफार्मों पर केवल 22 कैमरे ही चालू किए गए हैं। इन कैमरों की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जा रहा है, जिसे अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है।
15 ब्लैक स्पॉट, पंचकूला एंट्री सबसे कमजोर कड़ी
कैटेगरी-ए रेलवे स्टेशन होने के बावजूद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन संवेदनशील स्टेशनों की सूची में शामिल है। स्टेशन के आसपास करीब 15 ऐसे ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर हैं। सबसे गंभीर स्थिति पंचकूला की ओर की एंट्री में देखी गई है।