फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने पंचकूला स्थित ईडी की विशेष अदालत में 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। ईडी ने पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट अलॉटमेंट स्कैम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत यह चार्जशीट दाखिल की थी।
दायर चार्जशीट के मुताबिक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था।
आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच में पता चला है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पदेन अध्यक्ष रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने गलत तरीके से भूखंडों का आवंटन किया था। ईडी की जांच में पता चला कि भूखंडों को आवंटित करने के लिए निर्धारित मूल्य को सर्कल दर से पांच गुना और बाजार दर से सात से आठ गुना कम रखा गया था।
सीबीआई ने जांच में पाया कि आवेदन की अंतिम तिथि के 18 दिन बाद आवंटन के लिए मापदंड बदल दिए गए थे। इसमें कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया है। जब प्लॉट अलॉट किए गए, उस दौरान पूर्व सीएम हुड्डा ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन थे। जिन्हें प्लाट अलॉट हुए वे उनके करीबी थे। एचएसवीपी की पॉलिसी 2011 के तहत निर्धारित योग्यता पूरी नहीं कर पा रहे थे। हर प्लॉट पर 15 से 35 फीसदी नुकसान सरकार को हुआ।