अब डंपिंग ग्राउंड की आई याद
स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बाद अफसरों को आया ख्याल
एडवाइजर मनोज परिदा ने डंपिंग ग्राउंड की सरप्राइज विजिट की
कहा-जेपी प्लांट के साथ मिलकर निकाला जाएगा स्थायी हल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बाद प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को डंपिंग ग्राउंड और गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट की याद आई है। वीरवार को एडवाइजर मनोज परिदा, मेयर राजेश कालिया, नगर निगम कमिश्नर व अन्य अधिकारियों ने सरप्राइज विजिट किया।
स्वच्छता रैंकिंग में चंडीगढ़ इस बार तीसरे स्थान से लुढ़ककर 20वें स्थान पर पहुंच गया है, जिसकी सबसे बड़ी वजह डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड बना है। एडवाइजर ने गारबेज प्रोसेसिंग के लिए लगे जेपी प्लांट के बारे में पूरी जानकारी ली। उन्होंने प्लांट के इंचार्ज एनके वोहरा से कूड़ा प्रोसेस करने में आ रही दिक्कतों के बारे में भी बातचीत की।
एडवाइजर ने कहा कि चंडीगढ़ में डंपिंग ग्राउंड एक बहुत बड़ी समस्या है। इसका हल अभी तक नहीं निकाला जा सका था, लेकिन अब वह इसका समाधान निकालने की पुरजोर कोशिश करेंगे। जेपी प्लांट के साथ सभी मुद्दों को सुलझाकर डंपिंग ग्राउंड से कूड़े का निष्पादन किया जाएगा। शत-प्रतिशत कूड़े के प्रोसेसिंग के लिए कोशिश करेंगे। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े का पहाड़ है, इसे किस तरह हटाना है, इस पर भी ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि इसका वैज्ञानिक समाधान ढूंढेंगे। इसका पूर्ण तरीके से समाधान निकालेंगे। एडवाइजर ने कंपोस्ट प्लांट केअलावा आरडीएफ प्लांट को भी देखा। उन्होंने कहा कि यहां तैयार होने वाले कंपोस्ट को नगर निगम का हार्टिकल्चर विंग उपयोग करे तो काफी लाभ होगा। वहीं, इससे कंपनी को भी लाभ होगा।
जेपी प्लांट के इंचार्ज एनके वोहरा ने कहा कि एडवाइजर ने समस्याएं सुनी हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें टिपिंग फीस दी जाती है और उनकी छोटी-छोटी समस्याओं का निपटारा किया जाता है तो वह एक माह के भीतर डंपिंग ग्राउंड से कूड़े के ढेर को समाप्त कर देंगे। एडवाइजर ने कहा कि जेपी प्लांट के साथ मिलकर स्थायी हल निकाला जाएगा। हालांकि, डंपिंग ग्राउंड की यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले 40 साल से शहरवासी इसका सामना कर रहे हैं, जिसका अभी तक कोई स्थायी हल नहीं निकाला गया।
वाटर वर्क्स-39 में भी पहुंचे सलाहकार
एडवाइजर मनोज परिदा ने सेक्टर-39 स्थित वाटर वर्क्स का भी निरीक्षण किया। नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने उन्हें कजौली वाटर वर्क्स से आ रहे कई फेज के पानी के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही रॉ वाटर स्टोरेज टैंकों के बारे में भी बताया। इस दौरान सलाहकार ने वाटर टेस्टिंग लैब को भी देखा।