पीजीआई में सूखा पेड़ कार पर गिरा, सवार घायल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई के नेहरू ब्लॉक में शनिवार को एक सूखा पेड़ कार पर गिर गया। कार में सवार पूर्व जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह के सिर में चोट लगी है। आसपास मौजूद लोगों ने दौड़कर उन्हें कार से निकाला। कार की छत, सामने का शीशा और बंपर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसा सुबह सवा आठ बजे हुआ। धर्मेंद्र की पत्नी कमलजीत कौर वर्तमान में पंचायत समिति की सदस्य हैं।
दड़वा निवासी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह वह पत्नी के साथ पीजीआई में टेस्ट रिपोर्ट लेने पहुंचे थे। उनकी पत्नी कमलजीत कौर जैसे ही गाड़ी से उतर कर पीजीआई के नेहरू ब्लाक की ओर बढ़ी अचानक ही सड़क किनारे खड़ा एक सूखा पेड़ टूटकर उनकी गाड़ी पर आ गिरा। यह देखकर आसपास खड़े लोगों ने दौड़कर उन्हें कार से निकाला। कमलजीत कौर ने बताया कि इस हादसे में किसी की जान भी जा सकती थी। धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रकार के हादसे आए दिन हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं।
427 सूखे पेड़ ऐसे, जो बने हुए खतरा
शहर में 427 सूखे पेड़ ऐसे हैं, जो कि आम लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन चुके हैं। दरअसल, सूखे पेड़ ने एक युवती की टांग छीन ली थी, ऐसे ही 1029 सूखे पेड़ चंडीगढ़ में नागरिकों की जान के लिए खतरा बने हैं। यह बात नगर निगम के चीफ इंजीनियर द्वारा हाईकोर्ट में सौंपे गए हलफनामे से सामने आई है। नगर निगम ने अपने हलफनामे में बताया है कि शहर में 1 लाख 65 हजार 497 पेड़ हैं, जिनमें से 1029 पेड़ सूख चुके हैं। इनमें से प्रशासन ने अभी सिर्फ 602 को हटाए जाने की ही अनुमति दी थी। बाकी बचे 427 को हटाने के लिए अनुमति का इंतजार है।
प्रशासन युवती को देगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को पीड़ित युवती के मुआवजे के बारे में भी अगली सुनवाई पर जवाब देने के आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और अदालत के सहयोग के लिए अमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाएगी। हाईकोर्ट ने ही पिछली कहा था कि शहर में ऐसे सूखे हुए पेड़ हैं, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के चीफ इंजीनियर को हाईकोर्ट तलब कर शहर के सभी सूखे पेड़ों सहित सड़कों के गड्डों और खुले पड़े मैनहोल्स के पूरा रिकॉर्ड के साथ हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दे दिए थे।
चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी
हाईकोर्ट की फटकार के बाद यूटी प्रशासन ने इस दिशा में कड़ा संज्ञान लिया है। ताकि इस प्रकार की नौबत दोबारा न आ सके। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार होम सेक्रेटरी ने चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट को अब यह जिम्मेदारी दी है। शहर में सूखे पेड़ों को हटाने की अनुमति देने की पावर अब एडवाइजर के पास नहीं रहेगी। एडवाइजर ने स्वयं संज्ञान लेते हुए यह जिम्मेदारी अब चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट को दे दी है। सूत्रों के मुताबिक चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट संतोष कुमार को नगर निगम व प्रशासन के बीच एक ज्वाइंट कमेटी बनाने के लिए कहा है। जो कि इस प्रकार की गतिविधियों पर आगे नजर रखें।