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बंदरों के आतंक का शिकार हुए व्यक्ति के परिजनों को 2 लाख का अंतरिम मुआवजा

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एमसी चंडीगढ़ ने दिया दो लाख रुपये मुआवजा
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नगर निगम को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच से नहीं मिली थी राहत
बंदर के पत्थर का स्लैब गिराने से हो गई थी युवक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
शहर में बंदरों के उत्पात से 2015 में हुई युवक की मौत के मामले में चंडीगढ़ नगर निगम ने परिजनों को दो लाख रुपये बतौर अंतरिम मुआवजा जारी कर दिया है। इससे पहले नगर निगम ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एकल बेंच के मुआवजे के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी, जहां नगर निगम को झटका देते हुए हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था।
भूपिंदर कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि उनका युवा पुत्र अमरजीत सिंह सेक्टर-22 के शोरूम में काम करता था। एक दिन शाम को घर आने के लिए शोरूम के बाहर खड़ा था। तभी शोरूम की छत पर बैठे बंदरों ने छत से एक बड़ी पत्थर की स्लैब नीचे फेंक दी, जो युवक के सिर पर लगी। गंभीर रूप से जख्मी युवक को पीजीआई ले जाया गया, जहां चार दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर युवक के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके पुत्र के इलाज में उनका एक लाख रुपये खर्च आया है, जिसके लिए निगम ही जिम्मेदार है।
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निगम शहर में बंदरों के उत्पात पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। पीड़ित परिवार ने इस लापरवाही की एवज में एमसी से परिवार के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। मुआवजा राशि न मिलने पर याची ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। सिंगल बेंच ने परिवार को अंतरिम राहत के तौर पर 2 लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश दिए थे। एमसी ने अब हलफनामा दायर कर हाईकोर्ट में यह जानकारी दी है कि एमसी ने परिवार को दो लाख का मुआवजा जारी कर दिया है। इससे पहले एमसी ने दो लाख रुपये मुआवजा जारी करने के हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेशों के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील भी दायर की थी, जिसे डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया था। डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा था कि सिंगल बेंच ने मृतक युवा के परिजनों को दो लाख रुपये जारी करने के अंतरिम आदेश दिए हैं, वह इस मामले में दखल नहीं देना चाहते। एकल बेंच ने एमसी के जवाब को रिकार्ड पर रखते हुए मामले की सुनवाई सात सितंबर तक स्थगित कर दी।
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