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दो खबरें पैकेज- जीएसटी: महंगे होंगे घरेलू और कामर्शियल सिलेंड

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जीएसटी: महंगे होंगे घरेलू और कामर्शियल सिलेंडर
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- हरियाणा में 55.25 लाख घरेलू गैस उपभोक्ताओं को झटका
- अभी तक टैक्स फ्री था घरेलू सिलेंडर, अब लगेगा 5 प्रतिशत जीएसटी
- कामर्शियल सिलेंडर पर था 12.5 प्रतिशत वैट, 0.75 प्रतिशत सेस, अब 18 फीसदी जीएसटी
मोहित धुपड़
चंडीगढ़।
कई दिनों की कशमकश के बाद आखिरकार घरेलू सिलेंडर भी जीएसटी के दायरे में आ गया है। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर अब 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे पहले घरेलू रसोई गैस पर कोई टैक्स नहीं था। यह हरियाणा के 55.25 लाख घरेलू रसोई उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका है, जबकि इससे गृहणियों का रसोई बजट भी बढ़ जाएगा। हरियाणा में अभी घरेलू रसोई गैस का रेट 573.50 रुपये (122.34 अनुदान समेत) है, लेकिन अब इसके मूल रेट में 5 प्रतिशत वृद्धि हो जाएगी।
इसके अलावा जीएसटी के बाद कामर्शियल सिलेंडर भी महंगा होगा। अभी हरियाणा में कामर्शियल सिलेंडर का दाम 1112 रुपये प्रति सिलेंडर है। इसमें 12.5 प्रतिशत वैट और 0.75 प्रतिशत सेस भी शामिल है। यानी अभी कामर्शियल सिलेंडर पर उपभोक्ता को 13.25 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है, लेकिन अब कामर्शियल सिलेंडर पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। उधर, इसी को लेकर प्रदेश की रसोई गैस एजेंसियां भी अभी पसोपेश में हैं।
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इस बाबत हरियाणा की तमाम तेल कंपनियों को निर्देश भेज दिए गए हैं। आईओसीएल के एक आला अफसर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि घरेलू सिलेंडर और कामर्शियल सिलेंडर दोनों 5 व 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में आ गए हैं। उनके अनुसार एक जुलाई को दोनों सिलेंडरों के रिवाइज्ड रेट जारी हो जाएंगे। उधर, हरियाणा में वित्त मामलों के विशेषज्ञ सुभाष गोयल के अनुसार घरेलू सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी तो रसोई पर चोट है, लेकिन कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट बढ़ने से रेस्तरां, होटल, मोटल व ढाबाें इत्यादि पर महंगाई के आसार भी बढ़ गए हैं।
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दूसरी खबर...

जीएसटी की जद में होंगे विदेशी कारोबारी
- अब मनमर्जी से देश में अस्थायी कारोबार नहीं कर पाएंगे विदेशी कारोबारी
- एडवांस में जमा करवाना होगा अनुमानित जीएसटी, 90 दिन की मिलेगी रजिस्ट्रेशन
चंडीगढ़।
जीएसटी से भारत ही नहीं विदेशों में बैठे कारोबारियों पर भी असर पड़ेगा। अब विदेशों में मौजूद कारोबारी या एनआरआई अपनी मनमर्जी से भारत आकर अपना अस्थायी कारोबार नहीं कर पाएंगे। यदि उन्हं देश में कुछ दिनों के लिए अपनी व्यवसायिक गतिविधियां चलानी हैं तो उन्हे जीएसटी के दायरे में रहकर काम करना होगा। इतना ही नहीं, उन्हें एडवांस में अनुमानित टैक्स अदा करना होगा।
इस बाबत केंद्रीय शुल्क (आडिट) आयुक्त कार्यालय के आला अफसर के अनुसार पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व हिमाचल प्रदेश सरकारों को संबंधित निर्देशों से अवगत करवा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर भारत में विभिन्न देशों की शैक्षणिक व इंडस्ट्रियल कंपनियों की व्यवसायिक गतिविधियां काफी ज्यादा रहती हैं। ये विदेशी कारोबारी यहां ट्रेड फेयर, इंडस्ट्रियल वर्कशॉप समेत कई तरह की अस्थायी कारोबार यहां करते हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई आय नहीं होती। बल्कि सरकार इन कारोबारियों को केवल उनके अस्थायी व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति देने तक हीसीमित रह जाती है।
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ये विदेशी कारोबारी भी अब जीएसटी के दायरे में होंगे। ऐसे कारोबारियों को देश में अपना अस्थायी कारोबार या व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करने से 5 दिन पहले जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन करनी होगी। ये रजिस्ट्रेशन केवल 90 दिनों तक ही मान्य होगाी, लेकिन उसके बाद भी यदि विदेशी कारोबारियों की गतिविधियां जारी रहती है तो उन्हें 90 दिन और यानी 180 दिन की जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेनी होगी।
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रजिस्ट्रेशन के दौरान ही संबंधित विदेशी कारोबारी को जीएसटी के अंतर्गत इलेक्ट्रानिक कैश लेजर के जरिए एडवांस में ही अनुमानित टैक्स जमा करवाना होगा। जिस दिन देश में उनकी व्यवसायिक गतिविधियां खत्म होंगी, उस दिन उनकी ओर से जमा करवाए गए एडवांस टैक्स का आंकलन किया जाएगा। जमा करवाया गया एडवांस टैक्स ज्यादा होगा तो विदेश कारोबारियों को वापस कर दिया जाएगा, कम होगा तो और वसूल लिया जाएगा।
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