चंडीगढ़ के गांव आधुनिक एवं कॉटेज उद्योग के रूप में विकसित हों : बंसल
कहा, प्रशासन ने जिन 13 गांवों की ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल किया है वे लोगों के हित में नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने जिन 13 गांवों की ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल किया है वे उन गांवों के लोगों के हित के अनुरूप नहीं है। यह न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि गांव को आधुनिक और कॉटेज उद्योग के रूप में विकसित किया जाए।
बंसल ने कहा कि चंडीगढ़ के अधिकांश गांवों की भूमि को विभिन्न उद्देश्यों के लिए अधिगृहित किया गया था, जिसके कारण कई भूमि मालिकों, जमींदारों के पास केवल छोटी आवासीय इकाइयों और बाड़े रह गए थे। बंसल ने कहा कि पिछले कई दशकों में इन परिवारों की संख्या बढ़ी और रहने के विकल्प न होने के कारण इन परिवारों ने अपने अपने बाड़ों में कुछ निर्माण भी किए, क्योंकि अब इन जगहों पर मवेशियों और उनके चारे आदि के भंडारण की आवश्यकता नहीं थी। जरूरत के अनुसार कुछ मामलों में लाल डोरे से बाहर के क्षेत्रों में भी निर्माण एक आवश्यकता हुई और ऐसे उदाहरण हैं कि आबादी देह (क्षेत्र) की तुलना में लाल डोरे के बाहर अधिक निर्मित क्षेत्र हैं।
ग्रामीणों ने महसूस किया कि नगरपालिका क्षेत्र में ग्राम सभा क्षेत्रों/राजस्व संपदाओं के विलय के साथ, मौजूदा निर्माण को नियमित किया जाएगा। हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इस तरह के सभी निर्माण को अवैध करार देने से गांव के लोगों कि उम्मीद भी टूटी और वे निराश भी हुए। न्यायिक तौर पर इन सभी पुरानी संरचनाओं को नियमित किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के लिए पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के प्रावधानों के तहत किसी भी नए जमीन का अधिग्रहण होना चाहिए।
बंसल ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि कृषि या डेयरी फार्मिंग के रूप में अपनी आय के पहले स्रोतों को खोने के बाद ग्रामीणों को गांवों में कॉटेज उद्योग को प्रोत्साहित करने तथा नई दुकानों और छोटे होटलों/ठहरने के घरों की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि ग्रामवासी अपनी आजीविका कमाने में सक्षम हो सकें। चंडीगढ़ के सभी 22 गांवों को दिल्ली के हौजखास और अन्य गांव के तर्ज पर पर आधुनिक गांवों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि गांव के लोग आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकें। इस तरह से चंडीगढ़ के गांव वाणिज्य और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हो जाएंगे।