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विकास के नाम पर महज 5 फीसदी वोट- प्रो. संजय कुमार

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भारतीय राजनीति में जाति फैक्टर सबसे मजबूत, पार्टियां जातीय समीकरण देख देती हैं टिकट : प्रो. संजय कुमार
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बोले- पार्टी के नाम पर 60 फीसदी और विकास के नाम पर मिलते हैं महज 5 फीसदी वोट
- आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टियों की रणनीति पर पीयू में विस्तार से चर्चा
- पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल समेत दिल्ली से कई प्रोफेसरों ने कई शिरकत

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भारत की राजनीति में जाति का काफी महत्व है। चुनाव लड़ने के लिए पार्टी पहले जातीय समीकरण देखती है, उसके बाद टिकट दी जाती है। टिकट के माध्यम से कोशिश की जाती है कि सभी जाति के उम्मीदवारों को टिकट मिल जाए। चुनाव लड़ते वक्त उम्मीदवार भाषण देता है, वह जताने की कोशिश करता है कि वह उन्हीं की जाति का है तो उन्हीं के लिए काम करेगा। वोटर्स भी इससे प्रभावित होते हैं। ये कहना है नई दिल्ली स्थित सीएसडीएस के डायरेक्टर प्रो. संजय कुमार का। वे सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के आईसीएसएसआर में आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियों की रणनीति पर आयोजित एक दिवसीय नेशनल सेमिनार में बोल रहे थे। सेमिनार में मुख्य अतिथि पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल सहित दिल्ली से कई प्रोफेसर भी शामिल हुए। इस अवसर पर पीयू के वीसी प्रो. राज कुमार ने ग्रांट के लिए पंजाब सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि पीयू के बिल्डिंग्स के मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपए का एक प्रपोजल सरकार को भेजा गया है।

60 फीसदी लोग पार्टी के नाम पर देते हैं वोट
प्रो. संजय कुमार ने कहा कि जातिगत फैक्टर कम होने की बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि दिल्ली-एनसीआर में हर गाड़ी के पीछे जाट, गुज्जर, चौधरी, यादव जैसे कई स्टिकर लगे होते है, जो साफ दर्शाते हैं कि युवा भी अपनी जाति को प्रोमोट कर रहे हैं। भारत में वोट देने वालों में से 60 फीसदी पार्टी के नाम पर वोट देते हैं। 15 फीसदी उम्मीदवार के नाम पर वोट दिया जाता है, जिसमें उसके जाति का हिस्सा भी शामिल है। वहीं महज 5 से 8 फीसदी वोट ही काम व मुद्दे के नाम पर दिया जाता है।
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राजनीति में विचारधारा ही तय करती है पार्टी व रास्ता
प्रो. संजय कुमार ने कहा कि भारत में होने वाले किसी भी स्तर के चुनाव में तीन कारक होते हैं। विचारधारा, जाति और मनी पावर। क्या चुनावों में विचारधारा मायने रखता है, इस सवाल का जवाब देते हुए प्रो. संजय कुमार ने कहा कि साल 1967 से 2014 तक भारतीय जनता पार्टी को एक ही विचारधारा के ज्यादातर लोग वोट देते आए हैं। राजनीति में विचारधारा ही पार्टी व रास्ता तय करती है। एक पार्टी से दूसरी पार्टी ज्वाइन करते ही रातों रात व्यक्ति की विचारधारा भी बदल जाती है।

युवाओं में देश बदलने की ताकत : मनप्रीत बादल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने कहा कि युवाओं में देश बदलने की ताकत है। वह चाहें तो देश को भ्रष्टाचार, गरीबी व ड्रग मुक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में यूथ का काफी महत्वपूर्ण किरदार रहने वाला है। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीति में आना चाहिए ताकि देश की राजनीति में नए नए प्रयोग हो सके। यह देश के लिए भी काफी अच्छा होगा।

पुलवामा हमला सरकार और इंटेलिजेंस की बड़ी नाकामी
दिल्ली स्थित जेएनयू के पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर जोया हसन ने कहा कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ हमला सरकार और इंटेलिजेंस की बड़ी नाकामी है। इसका खामियाजा पूरे देश ने भुगता है। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना नहीं होता बल्कि एक खास विचारधारा की तरफ लोगों को लेकर जाना होता है। बीते सालों में यह बार बार देखने को मिला है। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी खुद को हिंदू के तौर पर प्रोमोट किया है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने से कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है। सभी पार्टियों के लिए लोकसभा 2019 चुनाव काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
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2019 चुनावों में सोशल मीडिया का अहम रोल
प्रो. सुरिंदर शुक्ला ने लोकसभा चुनावों में सोशल मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण स्थान बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सभी पार्टियां एक एक व्यक्ति, खासकर युवाओं तक पहुंचने का प्रयास करेंगी। इस बीच कई तरह की अफवाहें भी फैलाईं जाएगी, जिनसे सावधान रहने की जरूरत है।

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