फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पर्यावरण से था प्रेम, इसलिए पर्यावरण प्रेमी से की शादी

विज्ञापन
विज्ञापन
वैलेंटाइन डे वीक :: प्रोमिस डे स्पेशल
विज्ञापन


फ्लैग : पीयू की प्रोफेसर सुमन मोर ने कल्पनाओं के संस्कार को हकीकत में बदला

पर्यावरण प्रेमी सुमन ने पर्यावरणविद् से रचाया ब्याह

- बच्चों के लिए की थी जो कल्पना वह भी उसी रास्ते पर चल रहे

फोटो---

सुशील कुमार
चंडीगढ़। कल्पनाओं के संसार में तो हर कोई धूम मचाता है, पर हकीकत में उसे निभाते बहुत कम हैं। अपनी कल्पनाओं के संसार को जिन्होंने हकीकत में बदला उनमें एक चर्चित नाम है यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सुमन मोर का। उन्होंने कल्पना की थी कि वह खुद पर्यावरण प्रेमी बनेंगी, पर्यावरण प्रेमी से ही शादी रचाएंगी और बच्चों को भी पर्यावरण से जोड़ेंगी। उन्होंने खुद से की इस प्रॉमिस को अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और कल्पनाओं से हकीकत में बदल डाला।
विज्ञापन

हिसार की रहने वाली प्रो. सुमन मोर का परिवार पर्यावरण से प्रेम करता था। इसलिए वह भी उसी में ढल गईं। उन्होंने सपना देखा कि वह पर्यावरण के जरिये अपना करियर बनाएंगी, अपनी ही फिल्ड के व्यक्ति से शादी करेंगी और बच्चों को भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाएंगी। वर्ष 1996 में बीएससी की और 1998 में हिसार विश्वविद्यालय से साइंस के साथ एनवायरमेंट में इंजीनियरिंग की। कुछ लोगों ने बोला कि एनवायरमेंट विषय उन्होंने क्यों चुन लिया, इसमें भविष्य नहीं बनेगा। उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रहीं। हिसार में ही उनकी मुलाकात बैचमेट डॉ. रविंद्र खैवाल से हुई। उनको भी पर्यावरण से काफी प्रेम था। दोनों की बातचीत आगे बढ़ती गईं। शादी के लिए भी दोनों राजी हो गए। परिवार भी रिश्ते से खुश थे, लेकिन प्रो. सुमन मोर की पहले कल्पना जॉब पाने की थी। दोनों में से एक का जॉब करना जरूरी था। उसी दौरान प्रो. सुमन मोर ने आईआईटी दिल्ली से पीएचडी शुरू कर दी। वेस्ट मैनेजमेंट में बेहतर कार्य किया। परिणाम भी सामने आए। डॉ. रविंद्र खैवाल यूके व बेल्जियम में पर्यावरणविद बन गए। इसकी सूचना मिलने पर सुमन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वर्ष 2003 में परिवारवालों ने दोनों ने शादी करा दी। शादी के बाद प्रो. सुमन मोर भी पीयू के पर्यावरण विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गईं। कल्पना ये भी थी कि शादी के बाद पति पत्नी दोनों एक साथ रहेंगे। इसलिए पत्नी के सपनों व देशप्रेम के लिए डॉ. रविंद्र खैवाल ने यूके व बेल्जियम को बाय बाय कह दिया और पीजीआई में वर्ष 2011 में पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग में नौकरी पा ली। आज उनका परिवार खुशहाल है। प्रो. सुमन मोर व डॉ. रविंद्र खैवाल चंडीगढ़ ही नहीं देश के कई हिस्सों में पर्यावरण को बचाने का संदेश दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें