शिक्षा विभाग द्वारा 10 फरवरी से आधिकारिक तौर पर शुरू होगी हेल्पलाइन, लेकिन परीक्षा से चिंतित स्टूडेंट्स की कॉल आनी शुरू
पूछ रहे स्टूडेंट्स- पढ़ाई बहुत करते हैं... पर कुछ याद ही नहीं होता
- पेरेंट्स भी टेंशन में, एक अभिभावक ने पूछा- बच्चे के नंबर नहीं आए तो मेडिकल में कैसे होगा दाखिला
रिशु राज सिंह
चंडीगढ़। क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय.. कोई तो बता दे इसका हल हो मेरे भाई.. जी हां! परीक्षा को लेकर तनाव में आए स्टूडेंट्स का हाल कुछ ऐसा ही है। अब इस समस्या का हल ढूंढने के लिए स्टूडेंट्स चंडीगढ़ शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल्स कर रहे हैं। केवल ट्राइसिटी ही नहीं दिल्ली, बठिंडा, अंबाला व अन्य जगहों से भी कॉल्स आ रही हैं। स्टूडेंट्स पूछ रहे हैं कि वह पढ़ाई तो बहुत करते हैं, लेकिन कुछ याद ही नहीं होता। स्टूडेंट्स के अभिभावक भी इस टेंशन से अछूते नहीं हैं। शहर की एक टीचर के पास दिल्ली से एक स्टूडेंट के पिता की कॉल आई और उन्होंने पूछा- अगर उनके बच्चे के अच्छे नंबर नहीं आए तो उसका मेडिकल में कैसे दाखिला होगा। इसके अलावा स्टूडेंट्स तरह तरह के सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि विभाग द्वारा जारी किए गए नंबरों पर आधिकारिक सेवा 10 फरवरी से शुरू होनी है, लेकिन स्टूडेंट्स की तरफ से कॉल किए जा रहे हैं। यह अच्छी बात है कि टीचर्स भी उनकी हर तरह से मदद कर रहे हैं।
मुझे साइंस बिल्कुल नहीं आती, कैसे शुरू करूं..
हेल्पलाइन पर अंग्रेजी, साइंस, इकोनॉमिक्स व काउंसलर्स के पास सबसे ज्यादा कॉल्स आ रही हैं। औसतन इन सब्जेक्ट्स के टीचर्स के पास 2-3 कॉल्स रोजाना आ रही हैं। एक टीचर ने बताया कि उन्हें चंडीगढ़ के एक छात्र का कॉल आया और उसने कहा कि मुझे साइंस बिल्कुल नहीं आती, कैसे शुरु करूं...। स्टूडेंट के इस सवाल पर टीचर ने कहा कि पहले वह आसान चैप्टर्स को पढ़ें। वो याद जल्दी होंगेे जिससे कि कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। वहीं एक टीचर ने बताया कि उन्हें एक छात्र ने कॉल कर कहा कि वह इकोनॉमिक्स पढ़ा दें। जिस पर टीचर ने कहा कि वह पढ़ा नहीं सकते, लेकिन अगर उनका कोई सवाल है तो उसका जवाब जरूर देंगी। इसके बाद स्टूडेंट ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। अंग्रेजी के परीक्षा के पैटर्न में हुए बदलावों को लेकर भी छात्र इन हेल्पलाइंस नंबरों पर कॉल कर जानकारी मांग रहे हैं।
टीचर्स के बताने तरीके हैं काफी रोचक
टीचर्स ने बताया कि कुछ कॉल ऐसी भी आती हैं, जिनमें स्टूडेंट्स कहते हैं कि वे एक ही लेसन को कई बार याद कर चुके हैं, लेकिन याद नहीं रह पाता है। ऐसे में हम उन्हें मोटिवेट करते और थ्योरी याद करने के लिए अन्य तरीके बताते हैं। कई बार जब स्टूडेंट्स को कॉल पर समझ नहीं आता तो उन्हें कागज पर लिख कर व्हाट्सएप से भेजते हैं। इनमें ज्यादातर मैथ्स के सवाल व साइंस के इक्वेशन होते हैं। टीचर्स ने बताया कि कई बार स्टूडेंट्स कॉल कर बताते हैं कि उन्हें जो सवाल नहीं आया, उसे कॉल सेंटर की मदद से आसानी से समझ में आ गया।
दबाव नहीं सपोर्ट करें पैरेंट्स
हेल्पलाइंस पर ऐसे भी कॉल आ रहे हैं, जिनमें स्टूडेंट्स पैरेंट्स द्वारा पढ़ाई के लिए दबाव बनाने संबंधित शिकायत कर रहे हैं। परीक्षाओं के दौरान स्टूडेंट्स के ऊपर वैसे ही दबाव रहता है। ऐसे में पैरेंट्स द्वारा पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव डालना, उन्हें डिप्रेशन में ले जाता है। ऐसे में परीक्षा के दौरान पैरेंट्स को बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करना चाहिए ताकि वे अपनी परेशानी भी आपके शेयर कर सकें।
वर्जन---
10 फरवरी से हेल्पलाइन पर सेवा शुरू हो रही है, लेकिन टीचर्स के नंबर पब्लिक होने की वजह से कॉल्स आनी शुरू हो गई हैं। सभी टीचर्स द्वारा स्टूडेंट्स के हर सवाल का जवाब दिया जा रहा है। - अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी